अमेरिका के न्याय विभाग के कार्यालय (Office of Public Affairs, U.S. Department of Justice) ने एक दिल दहला देने वाले मामले में दो व्यक्तियों को सज़ा सुनाए जाने की घोषणा की है. यह मामला जनवरी 2022 में हुई एक त्रासदी से जुड़ा है, जिसमें अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे चार भारतीय नागरिकों की कनाडा-अमेरिका सीमा पर कड़ाके की सर्दी में मौत हो गई थी. मृतकों में एक दंपति के साथ उनकी 11 वर्षीय बेटी और महज तीन साल का बेटा शामिल था.
मामले के मुख्य आरोपी हरषकुमार रमनलाल पटेल (29), जो भारतीय नागरिक हैं और पहले फ्लोरिडा में रहते थे, को 10 साल 1 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई है. सज़ा पूरी होने के बाद उन्हें अमेरिका से देश निकाला दे दिया जाएगा. उनके साथी और सह-षड्यंत्रकारी स्टीव एंथनी शैंड (50), जो फ्लोरिडा के ही रहने वाले हैं, को 6 साल 6 महीने की जेल और 2 साल की निगरानी में रिहाई की सज़ा सुनाई गई है.
पटेल और शैंड एक संगठित मानव तस्करी रैकेट का हिस्सा थे, जो नकली वीज़ा के सहारे भारतीय नागरिकों को कनाडा लाकर फिर उन्हें अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कराता था. पटेल ने लॉजिस्टिक योजना तैयार की, जबकि शैंड ने सीमावर्ती इलाकों से प्रवासियों को उठाकर अमेरिका के भीतर पहुँचाया. इस पूरी योजना के लिए प्रति व्यक्ति 1 लाख डॉलर वसूले जाते थे, और अपराधियों ने मौसम की चेतावनियों तक को अनदेखा कर दिया.
18-19 जनवरी 2022 की रात जब तापमान -45 डिग्री फ़ारेनहाइट तक पहुँच चुका था, शैंड और पटेल ने 11 लोगों को कनाडा से अमेरिका में पैदल प्रवेश कराया. मौसम विभाग की ओर से चेतावनी पहले ही जारी की जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद यह जानलेवा प्रयास किया गया. 19 जनवरी की सुबह, अमेरिका की सीमा सुरक्षा एजेंसी ने बर्फ में फंसे शैंड को पकड़ा. उसी दिन, कनाडा की रॉयल माउंटेड पुलिस ने सीमा के उस पार बर्फ में जमे चार भारतीय नागरिकों के शव बरामद किए—एक पिता, मां और उनके दो मासूम बच्चे. तीन साल का बच्चा अपने पिता के सीने से लिपटा हुआ पाया गया, जिसके चेहरे पर बर्फ जम चुकी थी.
अमेरिकी न्याय विभाग के क्रिमिनल डिविजन प्रमुख मैथ्यू आर. गेलोएटी ने कहा, “पटेल और शैंड ने सिर्फ अपने फायदे के लिए नन्हें बच्चों की जान जोखिम में डाली. यह मामला मानव तस्करी के खतरनाक दुष्परिणामों को उजागर करता है.” वहीं, मिनेसोटा की कार्यवाहक अटॉर्नी लिसा डी. किर्कपैट्रिक ने कहा, “जब भी इस मामले की बात होती है, मैं उन मासूम बच्चों के बारे में सोचती हूं जो बर्फ में मर गए. यह घटना मानवता के खिलाफ अपराध है.”
नवंबर 2024 में एक जूरी ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था. उनके खिलाफ गंभीर अपराधों के तहत मुकदमा चलाया गया, जिसमें जान को खतरे में डालना, अवैध रूप से अमेरिका में घुसपैठ कराना और मानव तस्करी शामिल थी.
यह मामला न केवल कानून की सख्ती का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि लालच और गैरकानूनी रास्ते कितनी भयावह त्रासदियों को जन्म दे सकते हैं. यह न्याय उन मासूमों को श्रद्धांजलि है जो इन अपराधियों की लापरवाही का शिकार बने.
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-भारत एक्सप्रेस
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