महापंचायत का 'महा-विस्फोट'
IPS Puran Kumar Suicide Case: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला अब हरियाणा और चंडीगढ़ की राजनीति में हाई-वोल्टेज संघर्ष में बदल गया है. न्याय की मांग को लेकर गठित ‘न्याय संघर्ष मोर्चा’ ने रविवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-20 स्थित गुरु रविदास भवन में महापंचायत आयोजित की जिसने हरियाणा सरकार को एक सीधा और कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है. महापंचायत ने साफ ऐलान किया है कि यदि 48 घंटे के भीतर हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को उनके पद से नहीं हटाया गया और गिरफ्तार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा.
आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में अब न्याय संघर्ष मोर्चा ने मोर्चा संभाल लिया है. संघर्ष समिति ने रविवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-20 में स्थित गुरु रविदास भवन में एक महापंचायत बुलाई.
महापंचायत में सबसे बड़ा और सख्त फैसला यह लिया गया कि हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को तुरंत उनके पद से हटाया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए. इसके साथ ही, इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी मौजूदा या रिटायर्ड जज से कराने की भी मांग की गई है.
समिति ने हरियाणा सरकार को 48 घंटे का सीधा अल्टीमेटम दिया है. चेतावनी दी गई है कि अगर इस समय सीमा के अंदर डीजीपी को नहीं हटाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. इसमें शहर की सफाई व्यवस्था ठप करने जैसे बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू करने की भी बात कही गई है.
मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरन कुमार के शव का पोस्टमॉर्टम छठे दिन भी नहीं हो सका है. उनकी पत्नी, आईएएस अमनीत पी. कुमार, न्याय की मांग पर अड़ी हुई हैं. रविवार को उनके सेक्टर-11 स्थित आवास पर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ लंबी बैठक हुई. कैबिनेट मंत्री कृष्णा बेदी ने बताया कि परिवार की मांग पर रोहतक के एसपी को पहले ही हटाया जा चुका है और उम्मीद है कि मामला आज शाम तक सुलझ सकता है.
इस बीच, परिवार की एक बड़ी मांग को मानते हुए, चंडीगढ़ पुलिस ने देर रात एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) को जोड़ दिया है. परिवार का लगातार कहना था कि एक्ट तो लगा है, लेकिन उसके सबसे सख्त प्रावधान नहीं जोड़े गए थे.
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न्याय संघर्ष मोर्चा द्वारा दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम अब हरियाणा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. महापंचायत ने केवल डीजीपी को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग नहीं की है, बल्कि जांच हाईकोर्ट के जज से कराने की भी मांग रखी है. महापंचायत का राजभवन की ओर कूच का प्रयास साफ दिखाता है कि यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष बन चुका है. अब देखना यह है कि हरियाणा सरकार इस अंतिम चेतावनी पर क्या निर्णय लेती है और क्या डीजीपी शत्रुजीत कपूर की कुर्सी बच पाती है.
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