डोनाल्ड ट्रंप की नई शुल्क नीति और रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार पर संरक्षणवाद के प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अमेरिकी फाइनेंशियल इन्वेस्टर जिम रोजर्स ने चेतावनी दी है कि यह नीति अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है.
ट्रंप प्रशासन ने कनाडा, मैक्सिको और चीन के खिलाफ सख्त व्यापार नीतियां अपनाई हैं. हाल ही में, ट्रंप ने दो महत्वपूर्ण घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए, जिनके तहत स्टील और एल्युमिनियम पर मौजूदा शुल्क दर को 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया. इसके जवाब में, चीन ने करीब 21.2 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निर्यात पर 10% से 15% तक प्रतिरोधात्मक शुल्क लगाने की घोषणा की.
टैरिफ लगाने का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना और आयकर में छूट देना बताया गया है. हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी सरकार की कुल आय में टैरिफ का योगदान मात्र 1.2% है, जिससे आयकर में कटौती के लिए आवश्यक राजस्व जुटा पाना मुश्किल होगा.
इन व्यापार नीतियों के प्रभाव अमेरिकी शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ वॉर लंबा खिंचता है, तो इससे न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बल्कि वैश्विक व्यापार प्रणाली भी प्रभावित होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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