देश

इजरायल-ईरान जंग के बीच समझें कश्मीरी छात्रों के ‘तेहरान मोह’ का कारण? जानिए 5 बड़ी वजहें

Israel Iran Conflict: इजराइल के हालिया हमलों के बाद ईरान की गलियों में युद्ध की आहट साफ सुनी जा सकती है. दुनिया भर के देश अपने नागरिकों को तेहरान और मशहद छोड़ने की सलाह दे रहे हैं, एडवाइजरी जारी हो रही हैं और ‘ऑपरेशन सिंधु’ जैसी चर्चाएं फिर से जोर पकड़ रही हैं. लेकिन, इन सबके बीच एक दिलचस्प और हैरान करने वाली हकीकत यह है कि कश्मीर के सैकड़ों नौजवानों के लिए आज भी ईरान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि उनके सपनों की ‘पनाहगाह’ बना हुआ है.

आखिर क्या वजह है कि जब पूरी दुनिया ईरान से दूरी बना रही है, तब कश्मीर का युवा वहीं जाने की जिद पर अड़ा रहता है. आइये समझने की कोशिश करें भारतीय कश्मीरी छात्रों को ईरान में ऐसा क्या मिलता है?

कश्मीर जैसा ‘ईरान-ए-सगीर’

कश्मीर को अक्सर ‘ईरान-ए-सगीर’ (छोटा ईरान) कहा जाता है. यह जुड़ाव आज का नहीं, सदियों पुराना है. जब कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों से कोई छात्र तेहरान या कुम की सड़कों पर उतरता है, तो उसे वहां का मौसम, वास्तुकला और खान-पान अजनबी नहीं लगता.

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीरी छात्रों के लिए ईरान का चुनाव केवल एक ‘मजबूरी’ नहीं, बल्कि ‘सहजता’ है. वहां की सर्द हवाएं और चिनार जैसे दिखने वाले पेड़ उन्हें घर की याद दिलाते हैं. यही ‘सांस्कृतिक कंफर्ट जोन’ उन्हें युद्ध के डर से ऊपर ले जाता है.

NEET की दीवार पर किफायती रास्ता

भारत में मेडिकल की पढ़ाई एक ‘अग्निपरीक्षा’ जैसी है. जहां 23 लाख छात्र मात्र 1 लाख सीटों के लिए लड़ते हैं, वहां निजी कॉलेजों की करोड़ों की फीस मध्यमवर्गीय कश्मीरी परिवारों के बस से बाहर होती है. ऐसे में ईरान एक ‘मसीहा’ बनकर उभरता है. जहां पड़ोसी देशों में MBBS का खर्च 60 लाख तक जाता है, वहीं ईरान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज (जैसे शाहिद बेहिश्ती और तेहरान यूनिवर्सिटी) में यह 15 से 30 लाख रुपये में सिमट जाता है.

यहां की डिग्रियों को भारत का राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मेडिकल स्कूल्स (WDOMS) मान्यता देता है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहता है. एक यह भी कारण है कि कश्मीर के छात्रों की ईरान काफी पसंद आता है.

रूहानी सुकून की तलाश

शिक्षा केवल मेडिकल तक सीमित नहीं है. कश्मीर के शिया समुदाय के लिए ईरान का कुम और मशहद शहर ‘मक्का’ के समान महत्व रखते हैं. सद्दाम हुसैन के दौर में जब इराक का नजफ अस्थिर हुआ, तो कुम धार्मिक शिक्षा का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बन गया.

ईरानी सरकार इन छात्रों के लिए ‘सखी’ की भूमिका निभाती है. धार्मिक शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों की पूरी पढ़ाई, रहने और खाने का खर्च अक्सर वहां की सरकार या धार्मिक संस्थाएं उठाती हैं. यह आर्थिक सुरक्षा छात्रों को युद्ध के खतरे के बावजूद वहां टिके रहने का हौसला देती है.

यूक्रेन संकट से लिया सबक

हाल के वर्षों में यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग ने भारतीय छात्रों को बड़ा सबक दिया है. कश्मीरी छात्रों का मानना है कि ईरान का बुनियादी ढांचा और वहां की सरकार की अपने सिस्टम पर पकड़ इतनी मजबूत है कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपट सकते हैं. इसके अलावा, भारत सरकार की सक्रियता (ऑपरेशन सिंधु जैसे प्रयास) छात्रों को यह भरोसा दिलाती है कि ‘संकट के समय वतन उनके साथ खड़ा है.’

ये भी पढ़ें: अमेरिका कहता रह गया, इजरायल ने कर दिया ईरान पर हमला: रक्षा मंत्री ने दी जानकारी

डर और उम्मीद के बीच का सेतु

ईरान और इज़राइल के बीच तनाव (Israel Iran Conflict:) की खबरें आती रहेंगी, मिसाइलें भी चलेंगी, लेकिन कश्मीर के युवाओं के लिए ईरान एक ऐसा इल्म का दरिया है, जो कभी नहीं सूखता. यह झुकाव केवल डिग्री लेने तक सीमित नहीं है, यह एक रूहानी जुड़ाव है जो सरहदों और युद्धों की सीमाओं को नहीं मानता. बारूद की गंध के बीच भी वहां की यूनिवर्सिटीज में गूंजती कश्मीरी छात्रों की आवाज़ें इस बात का प्रमाण हैं कि शिक्षा की भूख, युद्ध के डर से कहीं बड़ी होती है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

करवा चौथ पर बन रहा है सबसे शक्तिशाली संयोग, जानें आज के चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ 2026 आज, 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. सुहागिन महिलाएं पति की…

2 minutes ago

करवा चौथ के चांद संग चमक जाएंगे इन राशियों के सितारे, बरसेगा बेहिसाब पैसा; जानें आज का राशिफल

29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को करवा चौथ के अवसर पर ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मेष,…

17 minutes ago

आजम खान पर ईडी का बड़ा शिकंजा: जौहर यूनिवर्सिटी की ₹426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क, मार्केट प्राइस ₹1,170 करोड़!

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सपा नेता आजम खान और मौलाना मोहम्मद…

8 hours ago

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 का रीडेवलपमेंट: 60 साल पुरानी इमारत की जगह होगा अत्याधुनिक ‘गेटवे’, सालाना 2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (CSMIA) ने टर्मिनल 1 (T1) के पुनर्विकास की पहली कलात्मक…

8 hours ago

अंडमान-निकोबार से ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान का आगाज: PM मोदी के संकल्प को साकार करने के लिए LG डॉ. दिनेश शर्मा ने कर्मियों को दिलाई शपथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी उन्मूलन के संकल्प को साकार करने के लिए अंडमान-निकोबार के…

9 hours ago