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छठ के बाद क्या टूट जाएगी JDU? संजय झा से तल्खी और बीजेपी का दफ्तर, जानिए क्या है ललन सिंह का अगला गेमप्लैन

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर मची कलह और अंतर्किराए ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. पार्टी के भीतर गुटबाजी और बयानों के तीरों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या छठ पर्व के बाद JDU में बड़ी टूट देखने को मिलेगी? हाल ही में पार्टी की बैठकों से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की दूरी और विधायकों की गोलबंदी ने इस चर्चा को और हवा दे दी है.

बिहार की राजनीति में JDU के भीतर बढ़ती गुटबाजी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की पार्टी की बैठकों से दूरी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. विधायकों की गोलबंदी और बयानों के दौर के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या छठ के बाद पार्टी में कोई बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बीजेपी गठबंधन की मजबूती को देखते हुए किसी बड़ी टूट से बचना चाहेगी.

प्रबोधन बैठक से दूरी और विधायकों की गुटबाजी

JDU द्वारा हाल ही में आयोजित 85 विधायकों की प्रबोधन बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को नहीं बुलाया गया, जिसने पार्टी के भीतर चल रहे मनमुटाव को सतह पर ला दिया. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नचिकेता मंडल, शालिनी मिश्रा, रामानंद मंडल, मीना कामत, पंकज मिश्रा और मंजीत सिंह समेत 6-7 विधायकों ने ललन सिंह के पक्ष में मुखर होकर आवाज उठाई, जिससे पार्टी में अंदरूनी खींचतान साफ नजर आने लगी है.

MLC चुनाव और बयानों से भड़की सियासत

MLC चुनाव के दौरान ललन सिंह द्वारा दिए गए बयानों ने विवाद को और गहरा दिया. उन्होंने अनंत सिंह द्वारा नीरज कुमार पर लगाए गए आरोपों को सही ठहराया था, जिसके बाद कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और ललन सिंह के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए. इसके अलावा, अक्टूबर में ललन सिंह का अचानक बीजेपी दफ्तर पहुंचकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया.

क्या सच में टूट जाएगी JDU? विश्लेषकों की राय

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि क्या यह अंतर्कलह पार्टी को टूटने की कगार पर ले जाएगी? वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी का मानना है कि मजबूत नेतृत्व के अभाव में यह गुटबाजी बढ़ी है, लेकिन बीजेपी फिलहाल नहीं चाहेगी कि JDU में कोई टूट हो ताकि इसका असर अन्य राजनीतिक समीकरणों पर न पड़े. वहीं, विश्लेषक रामबंधु वत्स का मानना है कि यदि ललन सिंह की उपेक्षा जारी रही, तो पार्टी का संगठन और अधिक चरमरा सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shubhra Rai

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