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क्या प्राइवेट कंपनियों पर कब्जा करेंगे हेमंत सोरेन? बीजेपी ने उठाए बड़े सवाल

संवाददाता-मधुकर आनंद


झारखंड में निजी क्षेत्र की कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए 75% आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. सीएम ने कहा था कि जो कंपनियां आरक्षण नहीं देंगी, उन पर सरकार कब्जा कर लेगी. इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी प्रवक्ता अजय शाह ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर तो सीएम के हाथ में नहीं है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी झारखंडियों को रोजगार नहीं दिया जा रहा.

भाजपा प्रवक्ता अजय शाह ने भारत एक्सप्रेस से बातचीत में सीएम हेमंत सोरेन पर तगड़े सवाल दागे. उन्होंने कहा कि सीएम की कार्यपालिका पर सवाल उठते हैं. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की बात तो दूर, सरकारी तंत्र में भी झारखंड के लोकल को अवसर नहीं मिल रहे. शाह ने तीन बड़े सवाल उठाए:

सवाल 1: बालू घाट में स्थानीय लोगों को काम क्यों नहीं मिल रहा? बाहर की कंपनियों को टेंडर दिए जा रहे हैं. यह क्षेत्र सीएम के कार्यक्षेत्र में आता है, फिर भी झारखंडियों को दरकिनार किया जा रहा है.

सवाल 2: शराब नीति में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पत्र लिखकर मांग की थी कि लोकल को शराब की दुकानों का ठेका दिया जाए. लेकिन सीएम ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. बाहर के लोगों को ही फायदा मिल रहा है.

सवाल 3: स्वास्थ्य विभाग के टेंडर सिर्फ एक मुस्लिम परिवार को क्यों दिए जा रहे हैं? अन्य विभागों में भी यही हाल है. जहां सीएम के हाथ में नियंत्रण है, वहां भी झारखंडियों को रोजगार नहीं मिल रहा.

अजय शाह ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन सिर्फ बयानबाजी करते हैं. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की बात करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी लोकल को अवसर नहीं दे रहे. जहां उनके हाथ में शक्ति है, वहां भी बाहर के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है. यह झारखंडियों के साथ अन्याय है.

क्या था वो बयान?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में कहा था कि निजी क्षेत्र में झारखंडियों को 75% आरक्षण मिलना चाहिए. जो कंपनियां आरक्षण नहीं देंगी, उन पर सरकार कब्जा कर लेगी. इस बयान को लेकर विपक्ष और उद्योग जगत में हंगामा मचा हुआ है. भाजपा ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है.

सीएम के बयान पर भाजपा हुई हमलावर

भाजपा का कहना है कि सीएम पहले अपने सरकारी क्षेत्र में झारखंडियों को रोजगार दें. टेंडर, ठेके और नियुक्तियों में पारदर्शिता लाएं. उसके बाद प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की बात करें. यह विवाद अब झारखंड की राजनीति में गरमागरम बहस का विषय बन गया है. भाजपा लगातार सीएम पर दबाव बना रही है कि पहले सरकारी क्षेत्र में लोकल को प्राथमिकता दें. वहीं सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र में आरक्षण से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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