Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील और जज के बीच हुई तगड़ी बहस ने अदालत के गलियारों में हलचल मचा दी है. यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब वकील महेश तिवारी ने एक विधवा महिला के कटे हुए बिजली कनेक्शन को बहाल करने की गुहार लगाते हुए जज राजेश कुमार से तर्क किया. बहस इतनी बढ़ गई कि बात लिमिट और खाली खोपड़ी तक पहुंच गई. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जनकर वायरल हो रहा है. आइये जानें क्या है पूरा मामला?
बिजली बिल को लेकर चल रही एक सुनवाई के दौरान वकील और जज के बीच तगड़ी बहस देखने को मिली. इसके बाद कोर्ट ने वकील महेश तिवारी के खिलाफ ऐक्शन लेते हुए अवमानना का केस दर्ज किया है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं.
वकील तिवारी ने एक विधवा महिला की ओर से दायर याचिका में जज राजेश कुमार के लिए कई तीखी बातें कह दी थीं. इसके बाद जज ने उनके खोपड़ी पर सवाल खड़ा कर दिया. ‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार, जज राजेश कुमार ने वकील की तीखी बातों के बाद कहा कि तिवारी जी, खोपड़ी खाली करके नहीं बैठे हैं न, खोपड़ी में है कुछ.
वकील तिवारी ने कहा कि मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आपके तरीके से नहीं, जैसा आप कहते हैं. प्लीज इसका ध्यान रखें. किसी वकील को बेइज्जत करने की कोशिश मत करें, मैं आपको बता रहा हूं. सर प्लीज किसी को बेइज्जत करने की कोशिश नहीं करें. देश जल रहा है, ज्यूडिशियरी के साथ. ये मेरे शब्द हैं. आप बहुत जानते हैं, आप जज हो गए हैं, हम लोग नहीं जानते हैं, वकील हैं. मैं अपने तरीके से बहस करूंगा. लिमिट क्रॉस मत करिए, प्लीज. मैंने पिछले 40 सालों से प्रैक्टिस की है.
इस मामले के एक दिन बाद शुक्रवार को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस रोंगन, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस शंकर की फुल बेंच में महेश तिवारी के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्ट मामले की सुनवाई शुरू की गई. इसे 11 नवंबर को सुनवाई के लिए अब लिस्ट किया गया है. क्रिमिनल कंटेम्ट का यह मामला अब चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली फुल बेंच के सामने जाएगा. जहां कोर्ट (Jharkhand High Court) की गरिमा और वकील के अधिकारों के बीच के संतुलन पर एक महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद है.
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झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) में जज और वकील के बीच हुई बहस न केवल न्यायिक प्रक्रिया के दौरान के तनाव को उजागर करती है, बल्कि कोर्ट में मर्यादा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर भी सवाल खड़े करती है. वकील महेश तिवारी ने एक विधवा महिला के पक्ष में दिवाली को देखते हुए बिजली बिल की रकम कम करने की मांग की थी, जिस पर जज राजेश कुमार ने स्पष्ट किया था कि वह ‘कोर्ट ऑफ लॉ’ हैं, ‘कोर्ट ऑफ जस्टिस’ नहीं, और उन्हें कानून के दायरे में ही फैसला देना होगा. हालांकि, बहस के दौरान जज को बेइज्जत करना या चेतावनी देना वकील के लिए महंगा साबित हुआ है.
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