नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की परेशानियों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि यह बेहद गंभीर विषय है और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है.
भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए नड्डा ने कहा कि संसद में राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान 150 पेपर लीक की घटनाओं का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच होना जरूरी है और सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी.
जेपी नड्डा ने दावा किया कि देश के कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और कर्नाटक का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस या विपक्षी दलों के समर्थन वाली सरकारें हैं.
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि आखिर इन राज्यों की घटनाओं का संसद में ज़िक्र क्यों नहीं किया गया. नड्डा के मुताबिक, अगर छात्रों के भविष्य की सच में चिंता होती तो सभी राज्यों के मामलों पर समान रूप से चर्चा की जाती. उनका आरोप था कि विपक्ष इस मुद्दे को छात्रों के हित से ज्यादा राजनीतिक लाभ के नजरिए से देख रहा है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं. ऐसे मामलों में केवल आरोप-प्रत्यारोप करने से कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि संसद इस विषय पर गंभीर और विस्तृत चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त मंच है.
नड्डा ने कहा कि चर्चा केवल इस बात तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि पेपर लीक कहां हुआ, बल्कि इस पर भी बात होनी चाहिए कि सरकारों ने इन घटनाओं के बाद क्या कदम उठाए, जांच कैसे आगे बढ़ी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-से ठोस उपाय किए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि जब पेपर लीक के मामले सरकार के संज्ञान में आए तो केंद्र सरकार ने जो कार्रवाई की, उस पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए. साथ ही राज्यों को भी यह देखना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है.
जेपी नड्डा ने कहा कि इस पूरे मुद्दे का सबसे अहम पहलू यह है कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि भविष्य में परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल न उठें.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नड्डा ने कहा कि विपक्ष जब भी चाहे, संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए समय तय कर सकता है. भाजपा और केंद्र सरकार इस बहस में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि बहस का मकसद एक-दूसरे पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी समाधान तलाशना होना चाहिए जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लग सके.
उन्होंने कहा कि देश के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करना सरकार और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है. इसलिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर ऐसी नीति तैयार करनी चाहिए, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे.
अपने संबोधन के अंत में जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसद में चर्चा करने के पक्ष में रही है. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी गंभीर विषय पर संवाद से पीछे नहीं हटती और छात्रों से जुड़े मामलों को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देख रही है. उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का स्थायी समाधान केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शी व्यवस्था और सभी पक्षों के सहयोग से ही संभव है.
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-भारत एक्सप्रेस
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