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“जमीन खाली करो…” जम्मू में रोहिंग्या बस्ती पर चला प्रशासन का डंडा, थमाया नोटिस; भारत एक्सप्रेस के कैमरे पर बताई पूरी सच्चाई

Jammu Rohingya basti: जम्मू/रवि शर्मा: जम्मू के करयानी तालाब इलाके में रोहिंग्याओं द्वारा बनाई गई कथित अवैध बस्ती के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई शुरू हो गई है. प्रशासन की ओर से संबंधित जमीन को खाली करने के निर्देश जारी किए गए हैं. निर्देश मिलने के बाद यहां रह रहे लोग अपनी झुग्गियों को हटाने में जुट गए हैं.

भारत एक्सप्रेस की ग्रांउड जीरो पड़ताल

भारत एक्सप्रेस की टीम ने करयानी तालाब के ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर यहां रह रहे लोगों से बातचीत की. इस दौरान कुछ रोहिंग्याओं ने बताया कि जिस जमीन पर उन्होंने अपनी झुग्गियां बनाई हैं, उसके मालिक ने उन्हें जमीन खाली करने के लिए कहा है. इसके बाद वे अपनी झुग्गियां हटाने की तैयारी कर रहे हैं.

यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उनके साथ परिवार के सदस्य और बच्चे भी हैं और जमीन खाली करने के बाद उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो जाएगी. उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इसके बाद वे कहां जाकर रहेंगे.

जमीन मालिक को भी प्रशासन का नोटिस

वहीं, करयानी तालाब में जिस जमीन पर यह बस्ती बनी हुई है, उसके मालिक को भी प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है. प्रशासन ने जमीन की स्थिति और उसके इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा है. साथ ही यह भी पूछा गया है कि कृषि भूमि पर बिना अनुमति के बस्ती किस आधार पर बसाई गई.

समिति ने किया था करयानी तालाब का दौरा

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से एक समिति जम्मू-कश्मीर भेजी गई थी. समिति ने जम्मू-कश्मीर में कथित जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़े मुद्दों का जायजा लिया था. इस दौरान समिति ने जम्मू के करयानी तालाब इलाके में मौजूद रोहिंग्या बस्ती का भी दौरा किया था.

समिति के दौरे के कुछ ही दिनों बाद अब करयानी तालाब में प्रशासन की कार्रवाई सामने आई है. हालांकि, प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई के व्यापक कारणों और आगे की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.

रोहिंग्याओं को हटाने की मांग उठाते रहे हैं संगठन

जम्मू से रोहिंग्याओं को हटाने की मांग को लेकर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन सरकार से कार्रवाई की मांग करते रहे हैं. इन संगठनों की ओर से आरोप लगाया जाता रहा है कि कुछ रोहिंग्या आपराधिक और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं.


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हालांकि, ऐसे आरोपों को सभी रोहिंग्याओं पर लागू नहीं किया जा सकता और किसी व्यक्ति की संलिप्तता का निर्धारण संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है.

जम्मू में कुछ संगठन यह आरोप भी लगाते रहे हैं कि एक सुनियोजित तरीके से रोहिंग्याओं को जम्मू में लाकर बसाया गया. इन संगठनों का दावा है कि इससे क्षेत्र के सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप पर असर पड़ सकता है. फिलहाल करयानी तालाब में प्रशासन की कार्रवाई के बाद वहां रह रहे लोगों के सामने विस्थापन और पुनर्वास का सवाल खड़ा हो गया है. आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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