अदालत के भीतर मुजरिम अक्सर अपने किए की माफी मांगते या गिड़गिड़ाते नजर आते हैं, लेकिन केरलम की एक अदालत में सोमवार को जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया. पलक्कड़ जिले के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या करने वाले 58 वर्षीय आरोपी चेंथामारा ने जज के सामने खुलेआम कहा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. आरोपी की बेखौफ बातों ने पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा खींच दिया.
सरकारी वकील एमजे विजयकुमार के अनुसार, कोर्ट में जब डिस्ट्रिक्ट प्रोबेशन ऑफिसर ने बताया कि चेंथामारा को हत्याओं का कोई अफसोस नहीं है और वह समाज के लिए एक बड़ा खतरा है, तो आरोपी तपाक से बोल पड़ा. उसने जज की आंखों में आंखें डालते हुए कहा कि हां, मुझे कोई दुख या पछतावा नहीं है. मैं गांधीवादी नहीं हूं. अगर कोई मेरे रास्ते में आएगा, तो मैं फिर से ऐसा ही करूंगा. इतना ही नहीं, उसने कानून व्यवस्था को उसे फांसी पर लटकाने की चुनौती भी दे डाली.
इस खौफनाक हत्याकांड की शुरुआत साल 2019 में हुई थी. दरअसल, एक ज्योतिषी ने चेंथामारा को बताया था कि उसकी पत्नी के उसे छोड़कर जाने के पीछे उसके पड़ोसी सुधाकरन के परिवार का हाथ है. इसी बात की खुन्नस में 2019 में चेंथामारा ने सुधाकरन के घर में घुसकर उसकी पत्नी सजिता की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी. इस मामले में उसे दोहरी उम्रकैद हुई थी.
लेकिन असली खेल तब हुआ जब वह जमानत पर बाहर आया. 27 जनवरी 2025 को वह दोबारा उसी घर में घुसा और इस बार उसने सुधाकरन और उसकी मां लक्ष्मी को मौत के घाट उतार दिया. हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि आरोपी उसी घर के आस-पास घूम रहा है.
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कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए गवाहों, मेडिकल और साइंटिफिक फोरेंसिक सबूतों की बारीकी से जांच की. इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने चेंथामारा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 101 (हत्या) और 126 (गलत तरीके से रोकना) के तहत डबल मर्डर का दोषी करार दिया है. इस दुर्दांत अपराधी की सजा का ऐलान 15 जुलाई को किया जाएगा. सरकारी वकील का कहना है कि वे इस ‘खतरनाक’ मुजरिम के लिए मौत की सजा (फांसी) की मांग करेंगे.
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