लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में सीबीआई की ओर से दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर राऊज एवेन्यु कोर्ट के विशेष सत्र न्यायाधीश विशाल गोगने 21 फरवरी को सुनवाई करेंगे. जबकि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कोर्ट 1 मार्च के लिए सूचिबद्ध किया है. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में कुछ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अभी भी अनुमति नही मिली है.
ईडी की ओर से दायर चार्जशीट में पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, मीसा भारती सहित अन्य को आरोपी बनाया है. जबकि सीबीआई ने 78 लोगो के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. पिछली सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि एक पूर्व सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है.
गृह मंत्रालय ने पूर्व सरकारी अधिकारी आर के महाजन के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. इससे पहले सीबीआई को 30 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है. कोर्ट से 7 अक्टूबर को सभी 9 आरोपियों को एक-एक लाख रुपए की निजी मुचलके पर जमानत मिल गई थी. कोर्ट ने सभी को पासपोर्ट सरेंडर करने को कहा था. सीबीआई द्वारा दायर अंतिम चार्जशीट में 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई के मुताबिक 38 कैंडिडेट्स है इसके अलावे कुछ अधिकारी शामिल है.
सीबीआई ने 6 मार्च को इस मामले में तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. जिसमे भोला यादव को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई द्वारा दाखिल पूरक आरोप पत्र में कहा गया है कि भोला यादव लालू प्रसाद यादव के सचिव रह चुके है और वही सभी काम देखते थे. भोला यादव ही अधिकारियों को निर्देश देते थे. इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित उनके परिवार के पांच सदस्य आरोपी है.
इसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव शामिल है. वही ईडी के मामले में कोर्ट ने 7 मार्च को राबड़ी देवी, मीसा भारती, हीमा यादव और हृदयानंद चौधरी को नियमित जमानत दी थी. कोर्ट ने 18 सितंबर को ईडी की ओर से दाखिल पहली पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. ईडी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पूर्व केंद्रीय रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव को आरोपी बनाया गया है. ईडी का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेलमंत्री रहते हुए नौकरी के बदले लोगों से जमीन ली थी.
राजद प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते बगैर किसी विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में नौकरियां दी. नौकरी देने के बदले उनसे या उनके परिवार के सदस्यों से लालू प्रसाद यादव ने उनकी जमीनें अपने परिवार के नाम लिखवा ली. इस मामले में सीबीआई और ईडी दोनों जांच कर रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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