उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित मदनी मस्जिद के कुछ हिस्सों को गिराने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर यूपी के संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने अगले आदेश तक बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर को बुल्डोजर कार्रवाई को लेकर दिशा निर्देश जारी किया था, जिसका पालन अधिकारियों द्वारा नही किया गया है.
जिसके बाद कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दोषी अधिकारियों को बख्शा नही जाएगा. कुशीनगर में मदनी मस्जिद नक एक हिस्से को इस महीने के शुरुआत में बुलडोजर द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था. जिसको लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.
13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किया था. कोर्ट ने कहा था कि बुलडोजर एक्शन को लेकर कम से कम 15 दिन की मोहलत दी जानी चाहिए. नोडल अधिकारी को 15 दिन पहले नोटिस भेजना होगा. कोर्ट ने नोटिस को डिजिटल पोर्टल पर भी डालने को कहा है. कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पोर्टल बनाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि कानून की प्रक्रिया का पालन जरूरी है. सत्ता का दुरुपयोग बर्दास्त नही होगा.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारी अदालत की तरह काम नही कर सकते हैं. प्रशासन जज नही हो सकता है. किसी की छत छीन लेना उसके मौलिक अधिकारों का हनन है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि सिर्फ आरोप के आधार पर किसी के घर को नही तोड़ा जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी का घर उसका सपना होता है कि उसका आश्रय कभी न छीने और हर घर का सपना होता है कि उसके पास आश्रय हो. हमारे सामने सवाल यह है कि क्या कार्यपालिका किसी व्यक्ति का आश्रय छीन सकती है जिसपर अपराध का आरोप है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बुलडोजर एक्शन का मनमाना रवैया बर्दास्त नही होगा. अधिकारी मनमाने तरीके से कम नही कर सकते. अगर किसी मामले में आरोपी एक है तो घर तोड़कर पूरे परिवार को सजा क्यों दी जाए? पूरे परिवार से उनका घर नही छीना जा सकता. बता दें कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुए बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोषी होने के बावजूद उसके घर को नही गिराया जा सकता है.
कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक सड़को पर, वॉटर बॉडी या रेलवे लाइन की जमीन पर अतिक्रमण से बने मंदिर, मस्जिद या दरगाह है तो उसे जाना होगा. क्योंकि पब्लिक ऑर्डर सर्वोपरि है. वही तीनों राज्य सरकारों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि बुलडोजर की कार्रवाई से 10 दिन पहले नोटिस जारी किया गया था. एसजी ने कहा था कि यह कहना कि किसी विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है, तो यह गलत है.
-भारत एक्सप्रेस
Congress Ramleela Rally: दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA गठबंधन…
Brijbhushan Sharan Singh Statement: पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को…
ABVP Student Union Elections: ओडिशा से लेकर दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड तक छात्रसंघ चुनावों में…
दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार CJP संस्थापक Abhijeet Dipke को सशर्त जमानत मिल गई है. जानिए…
UP Assembly Election 2027: प्रतापगढ़ में अपना दल (एस) की जनसभा के जरिए अनुप्रिया पटेल…
श्री केशव रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि हर साल दशहरे…