विकास किशोर-फोटो-सोशल मीडिया
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर व मलिहाबाद से भाजपा विधायक जय देवी के बेटे विकास किशोर ने अपने समर्थकों के साथ मलिहाबाद थाने में धरना प्रदर्शन किया और इंस्पेक्टर सुरेश सिंह पर सपा नेताओं से रुपए लेने का आरोप लगाया है. दरअसल वह छेड़छाड़ के आरोपित भाजपा कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने के कारण नाराज थे. इसी के चलते उन्होंने करीब एक घंटे तक पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की.
विकास किशोर ने इंस्पेक्टर सुरेश सिंह पर सपा नेताओं से रुपये लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने का आरोप लगाने के साथ ही ये भी कहा कि अगर इंस्पेक्टर को रुपयों की इतनी अधिक भूख है तो वह खुद एक लाख रुपये हर महीने देने को तैयार हैं. इसी के साथ ही विकास ने ये भी कहा कि इंस्पेक्टर कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज न करें. भाजपा कार्यकर्ता कभी गुडंई नहीं करते हैं. यह काम तो सपा के लोग करते हैं.
विकास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नवी नगर के रहने वाले आकाश मौर्या को पुलिस सुबह सात बजे उठा लाई और उसके खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कर दिया. यही नहीं इंस्पेक्टर अब उस पर दुष्कर्म की धारा भी लगाना चाहते हैं. विकास ने एक पुरानी बात का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले एक बच्चे की मौत हो गई थी. आकाश ने न्याय के लिए उसके घरवालों का समर्थन किया था. इंस्पेक्टर ने उसी समय आकाश को चुनाव बाद जेल भेजने की धमकी दी थी. इसी के साथ ही विकास ने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर सपा नेताओं से हर महीने मोटी रकम लेते हैं.
बता दें कि धरना प्रदर्शन की सूचना के बाद एसीपी मलिहाबाद वीरेंद्र विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और विकास को मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया. तो वहीं विकास ने कहा है कि बकरीद के बाद एसीपी को ज्ञापन देकर कार्यकर्ताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों की सूची देंगे. कार्रवाई नहीं हुई तो वह फिर धरने पर बैठेंगे.
विकास किशोर के तमाम आरोपों का खंडन करते हुए मलिहाबाद इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने कहा कि थाने में जो भी तहरीर आती है उसकी जांच के उपरांत साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाता है. कौन किस राजनीतिक दल का कार्यकर्ता है यह मुझे नहीं पता है. रुपये लेकर मुकदमा दर्ज किए जाने की बात निराधार है. मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं. आकाश के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, मारपीट और छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज है. नोटिस तामील कराने के लिए पुलिसकर्मी उनके घर भेजे जा रहे थे, लेकिन वह हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे. इसलिए सुबह पुलिस बल भेज कर उन्हें नोटिस तामील कराने के लिए थाने लाया गया था. इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराकर परिवारीजन को सौंप दिया गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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