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आसिया अंद्राबी को सजा, महबूबा को दर्द! बोलीं- मानवीय आधार पर मिले पैरोल, भारत सरकार सजा पर करे पुनर्विचार

Mehbooba Mufti On Asiya Andrabi: कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा मिलने पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने चिंता जताई है. पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने आसिया अंद्राबी की उम्रकैद की सजा पर भारत सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की. उन्होंने उम्र का तकाजा देते हुए मानवीय आधार पर सशर्त पैरोल देने की मांग की.

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमारे और आसिया अंद्राबी के बीच भले ही वैचारिक मतभेद हों पर उनकी उम्र को देखते हुए इस मामले की समीक्षा जरूर होनी चाहिये.

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वो कई सालों से जेल में हैं. उनके पति 30 सालों तक जेल में रहे. जिसका प्रभाव उनके बच्चों पर पड़ा है. उनका तो इसमें कोई दोष नहीं है.

उम्रकैद की अवधारणा पर फिर से विचार हो- मुफ्ती

पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने इस दौरान उम्रकैद की अवधारणा पर फिर से विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस समय उम्रकैद की सजा को लेकर जो व्यवस्था लागू है, उसमें बदलाव की जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया कि उम्रकैद को पहले की तरह एक निश्चित अवधि की सजा बनाया जाना चाहिए. पहले उम्रकैद की सजा को 14 साल की निश्चित अवधि माना जाता था, इसलिए उसी व्यवस्था को फिर से लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए.

आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा

उनका यह बयान तब आया है जब दिल्ली की एक अदालत ने अलगाववादी नेता और दुख्तरान-ए-मिल्लत की संस्थापक आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही आसिया अंद्राबी की सहयोगी महिलाएं नसीरीन और सोफी फहमीदा को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया है. इस मामले में अदालत ने दोनों को 30-30 साल की सजा सुनाई है.

ये भी पढ़ें- दिल्ली विधानसभा को उड़ाने की धमकी, ईमेल से मचा हड़कंप

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अंद्राबी पहले ही काफी समय जेल में बिता चुकी हैं, इसलिए मानवीय आधार पर उन्हें सशर्त पैरोल देना चाहिये.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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