पहलगाम की खूबसूरत वादियों में पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने खून की होली खेली थी. उस हमले में 26 मासूमों की जान चली गई थी. कई परिवार उजड़ गए और देशभर में मातम छा गया. उस दिन बैसरन घाटी, जिसे लोग ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहते हैं, गोलियों और बारूद की गूंज से भर गई थी.
पहली बरसी से ठीक पहले भारतीय सेना ने ट्वीट कर कहा कि जब इंसानियत की सीमाएं तोड़ी जाती हैं, तो जवाब निर्णायक होता है. सेना ने साफ किया कि भारत भूलता नहीं है और न्याय मिल चुका है. इस बयान ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि आतंकियों की करतूत का हिसाब लिया गया है.
हमले के दौरान आतंकियों ने बिना किसी भेदभाव के पर्यटकों पर गोलियां बरसाईं. धर्म या पहचान को देखे बिना सिर्फ मौत बांटी गई. उस दिन का मंजर आज भी लोगों की रूह को कंपा देता है.
हमले के कुछ दिन बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया. 6 से 7 मई के बीच पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह कार्रवाई पहलगाम हमले के जवाब में थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी. भारत ने दिखा दिया कि वह चुप नहीं बैठेगा.
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इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. किसी ने अपना जीवनसाथी खोया, किसी ने अपने बच्चों को. लेकिन इस दर्द ने भारत को और मजबूत बनाया. सेना के संदेश और ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और न्याय दिलाने में पीछे नहीं हटेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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