कोमल शर्मा, सीनियर जर्नलिस्ट-भारत एक्सप्रेस
Caste census In India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 30 अप्रैल 2025 को हुई ‘सुपर कैबिनेट’ बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया. केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जातिगत जनगणना को शामिल करने का निर्णय लिया है. यह निर्णय राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा लिया गया, जिसमें कुछ शीर्ष मंत्री शामिल थे.
सरकार का कहना है कि यह कदम समाज के सभी वर्गों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस निर्णय को देश के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता के लिए जरूरी बताया.
1947 के बाद यह केवल दूसरा मौका होगा जब जातिगत जनगणना को औपचारिक रूप से जनगणना में शामिल किया जाएगा. इससे पहले 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन पूर्ण जातिगत जनगणना के बजाय केवल सामाजिक-आर्थिक जातिगत सर्वेक्षण (SECC) कराया गया था.
कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर जाति आधारित सर्वे किए हैं, लेकिन उनके परिणामों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी रही. इससे समाज में भ्रम और राजनीतिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई. केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जनगणना जैसे संवेदनशील विषय को राजनीति से दूर रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शी ढंग से किया जाएगा.
यह फैसला सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने और नीतिगत निर्णयों को डेटा-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. सरकार का उद्देश्य है कि समाज के हर तबके को समान अवसर और सम्मान मिले.
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