पैसा बचाना, पैसा कमाने के बराबर है. वर्षों तक भारत में चुनावी लाभ के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांटी गईं. लेकिन ये योजनाएं सरकार पर बोझ बढ़ाती हैं और दीर्घकालिक विकास को धीमा कर देती हैं. इसके बजाय, ऐसा मॉडल जरूरी है जो कुशलता बढ़ाए और बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर करे. मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों के लिए सीधे नकद लाभ देने के बजाय संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया है, जिससे उन्हें दीर्घकालिक बचत का फायदा मिल रहा है.
क्या आपको भी पहले टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों से परेशानी होती थी? 2017 से पहले, भारत के टोल प्लाजा पर औसतन 714 सेकंड तक इंतजार करना पड़ता था. इससे न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि ईंधन की खपत और गाड़ियों की मरम्मत लागत भी बढ़ती थी.
समाधान के रूप में सरकार ने टोल माफ करने की बजाय FASTag तकनीक पेश की. यह RFID तकनीक पर आधारित है, जिससे टोल भुगतान डिजिटल हो गया और आज 2024 में यह प्रतीक्षा समय घटकर मात्र 47 सेकंड रह गया है.
क्या आपने कभी सोचा है कि विकसित देशों में VISA और MasterCard जैसी कंपनियां डिजिटल भुगतान पर हावी हैं? भारत में भी पहले यही मॉडल अपनाया गया था, लेकिन महंगे POS मशीन चार्ज और MDR फीस के कारण डिजिटल लेन-देन सीमित थे.
UPI और RuPay कार्ड ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. 2016 से पहले भारत में सिर्फ 25 लाख POS मशीनें थीं, जिससे केवल बड़े व्यापारियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती थी. लेकिन 2023 तक भारत में 25 करोड़ QR कोड उपलब्ध हो चुके हैं, जिससे छोटे दुकानदार भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर पा रहे हैं.
छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSME) के लिए सबसे बड़ी समस्या सस्ता और आसान कर्ज पाना थी. पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली में असुरक्षित ऋणों पर ऊंची ब्याज दर ली जाती थी, जिससे छोटे व्यापारियों के लिए विस्तार करना मुश्किल था.
सरकार ने मुद्रा योजना, CGTMSE (क्रेडिट गारंटी स्कीम), डिजिटल क्रेडिट स्कोरिंग और फिनटेक इंटीग्रेशन के जरिए MSME को किफायती कर्ज की सुविधा दी.
मोदी सरकार का ध्यान नकद सब्सिडी देने के बजाय ऐसे सुधारों पर रहा है जो व्यक्तिगत बचत को बढ़ावा देते हैं. टोल प्लाजा पर इंतजार में कमी, विदेशी ट्रांजेक्शन फीस से बचत, और MSME को सस्ती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराना, ये सभी ऐसे सुधार हैं जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं.
इन बदलावों का असर किसी मुफ्त योजना जितना तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक लाभ इसे कहीं अधिक प्रभावी बनाते हैं. भारत अब एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है जहां लोग खुद सक्षम बनकर बचत कर सकें, न कि सरकार पर निर्भर रहें.
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-भारत एक्सप्रेस
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