मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह एक बार फिर चर्चा में हैं. लेकिन इस बार वजह कोई नई घोषणा नहीं, बल्कि एक पुराना घाव है जिसे भरने के लिए वे जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं. भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिए गए अपने विवादित बयान पर घिरने के बाद, मंत्री जी ने शनिवार को एक बार फिर ‘बिना शर्त’ माफी मांग ली है.
यह विवाद पिछले साल मई का है, जब इंदौर के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह का जोश उनके होश पर भारी पड़ गया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में कुछ ऐसी बातें कहते नजर आए, जिन्हें समाज ने ‘अशोभनीय और सांप्रदायिक’ माना. कर्नल सोफिया कुरैशी कोई साधारण नाम नहीं हैं; वे वही अधिकारी हैं जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना का पक्ष पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा था.
एक महिला सैन्य अधिकारी के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी ने न केवल सेना के सम्मान को ठेस पहुंचाई, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार की भी खूब किरकिरी कराई.
विजय शाह की यह ताजा माफी अचानक नहीं आई है. दरअसल, मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है. इससे पहले जब उन्होंने माफी मांगी थी, तो कोर्ट ने उसे यह कहकर सिरे से खारिज कर दिया था कि ये ‘नकली आंसू’ (crocodile tears) हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करने तक के निर्देश दे दिए थे.
मामला तब और गंभीर हो गया जब 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो टूक अल्टीमेटम दे दिया कि दो हफ्तों के भीतर मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) पर फैसला लिया जाए. जैसे ही यह डेडलाइन करीब आई, मंत्री जी ने शनिवार को इंदौर की रेजिडेंसी कोठी में कुछ चुनिंदा पत्रकारों को बुलाया और अपना पक्ष रखा.
पत्रकारों से बात करते हुए विजय शाह के सुर इस बार काफी नरम थे. उन्होंने अपनी सफाई में कहा, “उस वक्त जो कुछ भी मैंने कहा, वह सिर्फ देशभक्ति के उत्साह में निकला था. मेरा इरादा न तो भारतीय सेना का अपमान करना था, न किसी महिला अधिकारी का और न ही किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना.”
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने इस घटना पर काफी आत्ममंथन किया है और वे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं. शाह ने कसम खाई कि भविष्य में वे अपनी भाषा और शब्दों पर पूरा नियंत्रण रखेंगे. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी.”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह माफी सिर्फ पछतावा नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई से बचने की एक ढाल भी हो सकती है. जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है, उसने मंत्री की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखना कितना जरूरी है, यह सबक शायद अब विजय शाह को समझ आ गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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