नवादा के चांदो यादव हत्याकांड में 17 साल बाद फैसला आया.
Chando Yadav Murder Case: बिहार के नवादा जिले से न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास को और मजबूत करने वाली एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. लगभग 17 साल पुराने बहुचर्चित चांदो यादव हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उपेंद्र कुमार की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 5 आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में शुरुआत में पुलिस ने अपनी तफ्तीश के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सभी आरोपियों को ‘निर्दोष’ बता दिया था, लेकिन पीड़ित पक्ष की कानूनी लड़ाई और प्रोटेस्ट पिटीशन के बल पर आखिरकार न्याय की जीत हुई.
यह सनसनीखेज वारदात 24 जनवरी 2009 की है. मृतक चांदो यादव अपने साथी रामकृपाल यादव के साथ जा रहे थे, तभी अकबरपुर थाना क्षेत्र के कुडिलपुर बंदरकोल निवासी आरोपियों ने खुरी नदी के पास उन्हें घेर लिया. पुरानी रंजिश में बेखौफ आरोपियों ने चांदो यादव पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़पकर दर्दनाक मौत हो गई.
इस खौफनाक हमले में साथ मौजूद रामकृपाल यादव किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकलने में कामयाब रहे थे. घटना के बाद नगर थाने में कांड संख्या 35/09 के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी.
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. घटना के बाद पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) दाखिल की थी, जिसमें सभी नामजद आरोपियों को निर्दोष करार दे दिया गया था. हालांकि, चश्मदीद गवाह रामकृपाल यादव ने हार नहीं मानी और पुलिस की इस फर्जी रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में एक ‘प्रोटेस्ट परिवाद’ (Protest Petition) दायर किया.
कोर्ट ने पीड़ित पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू की. गवाहों के बयानों, बिसरा रिपोर्ट और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आखिरकार पुलिस की जांच को दरकिनार करते हुए सभी पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी माना.
सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए माननीय अदालत ने पांचों अभियुक्तों—राज कुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव को हत्या का दोषी पाया. कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत सभी 5 दोषियों को आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई.
इसके अलावा धारा 147 के तहत 2 वर्ष का कारावास और 3-3 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को अतिरिक्त जेल काटनी होगी. 17 साल लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है.
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-भारत एक्सप्रेस
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