आजकल की भागदौड़ भरी दुनिया में जहां आर्ट गैलरी महंगे कैनवास और केमिकल वाले रंगों से भरी रहती हैं, वहां मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक ऐसी खबर आई है जो आपको अपनी जड़ों से जोड़ देगी. नीमच के कुचड़ोद गांव के रहने वाले एक युवा कलाकार राहुल देव लोहार ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे पेंटर्स भी दांतों तले उंगली दबा लें. राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूज्य माताजी की एक ऐसी पेंटिंग बनाई है, जिसमें न तो महंगे बाजारू रंगों का इस्तेमाल हुआ है और न ही चमक-धमक वाले कैनवास का.
राहुल ने अपनी इस अनोखी कलाकृति के लिए घर में पड़ी साधारण जूट की बोरी (टाट) को चुना. आप सोच रहे होंगे कि भला बोरी पर पेंटिंग कैसे हो सकती है? यहीं पर राहुल की ‘कलाकारी’ काम आती है. उन्होंने सबसे पहले बोरी को साफ किया और फिर गाय के गोबर और मेथी के दानों का एक गाढ़ा लेप तैयार कर उस पर चढ़ाया. यह लेप जब सूख गया, तो वह एक मजबूत और टिकाऊ कैनवास में बदल गया. आमतौर पर चित्रकार खुरदरे बेस पर काम करने से बचते हैं, लेकिन राहुल ने इसी चुनौती को अपनी पहचान बना लिया.
सबसे हैरान करने वाली बात है इस पेंटिंग में इस्तेमाल किए गए रंग. राहुल ने किसी दुकान से रंग नहीं खरीदे, बल्कि प्रकृति की गोद से इन्हें निकाला. अलग-अलग फूलों की पंखुड़ियों को पीसकर और पेड़ों की हरी-भरी पत्तियों का अर्क (रस) निकालकर उन्होंने पेंटिंग के रंग खुद तैयार किए. इन्हीं कुदरती रंगों से उन्होंने पीएम मोदी और उनकी मां की तस्वीर में वह सादगी और भावनात्मक गहराई भर दी, जो किसी भी महंगे केमिकल कलर में मिलना मुश्किल है.
पिछले 15 सालों से चित्रकला की दुनिया में नाम बना रहे राहुल कहते हैं कि उनकी कला हमेशा समाज और प्रकृति के करीब रहती है. वे इस पेंटिंग के जरिए एक बड़ा संदेश देना चाहते हैं—कि कला कभी भी महंगे साधनों की मोहताज नहीं होती. उन्होंने ‘लोकल फॉर वोकल’ और पर्यावरण संरक्षण के जज्बे को अपनी पेंटिंग में पिरोया है.
राहुल के लिए यह कोई पहली बार नहीं है. इससे पहले कोरोना काल में भी उन्होंने अपनी कला से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था और उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था.
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-भारत एक्सप्रेस
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