गोरखपुर, 31 मई 2025: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार की देर रात गोरखपुर में मनी लॉण्ड्रिंग नेटवर्क के संदेह में जोरदार कार्रवाई की. जानकारी के मुताबिक, NIA की टीम ने तीन स्थान—रामगढ़ताल, खजनी और सहजनवां—में छापेमारी के साथ-साथ तारामंडल स्थित बुद्ध विहार पार्ट-ए में पन्ने लाल यादव के घर पर भी छापा मारा. सूत्र बताते हैं कि इस पूरे अभियान के दौरान न केवल परिवार के सभी सदस्यों के बैंक खातों की जानकारी ली गई, बल्कि रिश्तेदारों और बैंकॉक से हुंड़ी के जरिए आने वाले रुपयों के स्रोत की भी जांच-पड़ताल की गई.
पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा गया था. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि NIA के जवान देर रात पन्ने लाल यादव के गांव स्थित मकान पर पहुंचे और तीन दरवाजे तोड़कर घर में घुस गए। इस दौरान परिवार के सदस्यों से हाथापाई और परेशान करने की भी बात कही जा रही है. जिस घर में छापा मारा गया, वहाँ दीपक यादव नामक युवक ने खुद को मृतक का भतीजा बताया. दीपक ने बताया, “टीम रात करीब 12 बजे हमारे गांव पहुंची और घर के तीन दरवाजे तोड़ दिए. मुझ सहित परिवार के अन्य लोगों के साथ मारपीट की गई. फिर सुबह चार बजे मुझे और अन्य चाचा के लड़के-लड़कियों को शहर के एक मकान पर ले जाया गया.”
दीपक ने आगे कहा कि जब उन्होंने NIA की टीम से पूछा कि उन्हें वहाँ क्यों बुलाया गया, तब एजेंसी की टीम ने कह दिया कि “तुम्हारा मामला नहीं है, तुम चले जाओ,” और परिवार के अन्य युवकों को अलग स्थान पर ले जाकर पूछताछ की गई. आरोप है कि शहर स्थित उस मकान में चाचा की बेटियाँ और चाची भी थीं, जिन्हें भी NIA की टीम ने पूछताछ के दौरान परेशान किया. हालांकि, अभी तक NIA की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है.
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस मनी लॉण्ड्रिंग नेटवर्क की जाँच में NIA का संदेह है कि विदेश, विशेषकर बैंकॉक से अवैध तरीके से आने वाले पैसे को फर्जी दस्तावेज़ों और स्थानीय बैंक खातों के ज़रिए सफेद किया जा रहा था. पन्ने लाल यादव के परिवार के बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांज़ैक्शन मिलने पर एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर वैरिफिकेशन हेतु इस छापेमारी को अंजाम दिया.
हालांकि, दीपक यादव का कहना है कि पूरे मामले में परिवार के अधिकांश लोग इस क़िस्से से अनजान थे. “हमें नहीं पता था कि हवाला का कोई धंधा चल रहा है या नहीं, फिर भी रात के अंधेरे में घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट मानी नहीं जा रही,” उन्होंने दुख जताया. उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि अगर सचमुच किसी ने गलत काम किया है, तो उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, धमकाने और बेकसूरों को पीटने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
फिलहाल इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए NIA ने स्थानीय पुलिस को छापेमारी के दौरान केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालने का ही निर्देश दिया था. स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने बताया, “इस प्रकरण में NIA की गुप्तचर कार्रवाई है, इसलिए हमें विस्तार से जानकारी नहीं दी गई. अभी तक हमारी ओर से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, एजेंसी जो कार्रवाई कर रही है, वे अपने स्तर पर विधिक अनुसंधान कर रही हैं.”
विश्लेषकों का मानना है कि गोरखपुर सहित यूपी-बिहार के इस सीमा क्षेत्र में मनी लॉण्ड्रिंग के नेटवर्क पिछले कई वर्षों से सक्रिय हैं. विदेशी संगठनों से जुड़ी धनराशि यहाँ के स्थानीय गुंडा-राजनीति और अपराधी गिरोहों तक पहुँचती है, और फिर इस धन को बहुत आसानी से सफेद करने के तरीकों का सहारा लिया जाता है. NIA की इस छापेमारी से संभवतः इसी पूरे तंत्र की बारीकियों का पर्दाफाश होगा.
गोरखपुर में NIA की छापेमारी ने मनी लॉण्ड्रिंग मामले की गंभीरता को उजागर किया है. परिवार के सदस्यों पर मारपीट और जानकारियाँ जब्त करने के आरोपों के बीच अब सबकी नजरें उस अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिसमें यह साफ हो सकेगा कि इस जालसाजियों के पीछे कौन-कौन से कनेक्शन हैं और दोषियों को कितना जल्द कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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