Nitish Kumar Rajya Sabha: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर राज्य की राजनीति में चल रहे बड़े कयासों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है. खास बात यह है कि नीतीश कुमार ने अपने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए ठीक 165 शब्दों का सहारा लिया है. अपने इस संदेश में उन्होंने न केवल जनता का आभार व्यक्त किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार की जो ‘नई सरकार’ बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त रहेगा.
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में पिछले दो दशकों के सफर को याद करते हुए लिखा कि जनता के अटूट विश्वास के बल पर ही वे बिहार की सेवा कर पाए. उन्होंने आगे अपने जीवन की एक पुरानी इच्छा का जिक्र करते हुए लिखा-
‘संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं. इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं.’
इससे पहले उन्होंने लिखा कि ‘पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है. आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है. इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है.
नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को आश्वस्त किया है कि पद छोड़ने के बावजूद उनका संकल्प ‘विकसित बिहार’ के लिए वैसा ही रहेगा और वे भविष्य में भी राज्य के विकास में अपना योगदान देते रहेंगे. उन्होंने लिखा-
‘मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा. जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा’
मुख्यमंत्री के इस बयान से यह साफ हो गया है कि बिहार में अब सत्ता हस्तांतरण (Power Transition) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अमित शाह की पटना मौजूदगी और नीतीश के इस पोस्ट ने यह पक्का कर दिया है कि आज होने वाला नामांकन केवल एक व्यक्ति का राज्यसभा जाना नहीं है, बल्कि बिहार में एक नए नेतृत्व के उदय की शुरुआत है.
नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री के पद से हटना भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है. आठ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार को हमेशा ‘सुशासन बाबू’ के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने 2005 के बाद बिहार को ‘जंगलराज’ की छवि से बाहर निकालकर विकास की पटरी पर दौड़ाया. सड़क, बिजली और शिक्षा (विशेषकर साइकिल योजना और महिला सशक्तिकरण) के क्षेत्र में उनके काम ने न केवल बिहार की सूरत बदली, बल्कि उन्हें ‘विकास पुरुष’ की छवि भी दी.
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राजनीतिक सफर में ‘गठबंधन बदलने’ की चर्चाएं भी खूब रहीं, लेकिन बिहार की जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और प्रशासनिक पकड़ हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी रही. अब दिल्ली की राजनीति में उनकी नई पारी देश की राष्ट्रीय राजनीति को किस दिशा में ले जाती है, यह देखना दिलचस्प होगा.
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