फैक्ट चेक

क्या भारत बना युद्ध का अड्डा? जानें क्या है अमेरिका-ईरान विवाद के बीच इस वायरल दावे का सच

इस दौर में सोशल मीडिया के खबरें काफ तेजी से फैलती हैं.इसी बीच एक और खबर ऐसे ही फैल रही है. पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर एक दावा तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है किृ अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों में भारत के बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही सोशल मीडिया पर ये खबर तैर रही हैं कि इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई है और युद्ध का दायरा अरब देशों तक फैल चुका है. लेकिन इसकी असल सच कुछ और ही निकला. आइए जानते है.

कैसे शुरू हुआ खबर?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के एक टीवी चैनल ‘वन अमेरिका न्यूज’ (OAN) ने एक रिपोर्ट चलाई. इस रिपोर्ट में तथाकथित ‘सैन्य सूत्रों’ का हवाला देते हुए दावा किया गया कि अमेरिकी युद्धपोत भारतीय नेवल बेस का उपयोग करके ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.

यह रिपोर्ट जैसे ही वायरल हुई, एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अटकलों का बाजार गर्म हो गया. लोगों ने बिना सच्चाई जाने इसे सच मान लिया और इसे लेकर तमाम तरह की बहसें शुरू हो गईं.

सरकार ने खारिज किया हर दावा

विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘कोरी बकवास’ और ‘मनगढ़ंत’ करार दिया है. मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल के जरिए साफ कर दिया है कि भारतीय बंदरगाहों या नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए करने की बात पूरी तरह झूठ है. मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसी भ्रामक सूचनाओं के बहकावे में न आएं और न ही इन्हें आगे बढ़ाएं.

पश्चिम एशिया का तनाव

बता दें कि पश्चिम एशिया में पिछले कुछ दिनों से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. 28 फरवरी से शुरू हुई हमलों और जवाबी हमलों की सीरीज ने पूरे इलाके को एक बार फिर युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है. सैन्य ठिकानों से लेकर मिसाइल हमलों तक की खबरें आ रही हैं, जो निश्चित रूप से वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है.

लेकिन, इन सबके बीच भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है. नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है. भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि यहाँ करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं. इन नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है.

भारत की नीति: स्वतंत्र और स्पष्ट

भारत ने हमेशा यह दिखाया है कि वह किसी भी अफवाह या दबाव में अपनी विदेश नीति तय नहीं करता. मंत्रालय ने दोहराया है कि राष्ट्रीय संप्रभुता और देश के हितों से जुड़े मुद्दों पर भारत की राय हमेशा स्वतंत्र रहती है. किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी के आधार पर भारत की विदेश नीति नहीं चलती.

ये भी पढ़ें: क्या वाकई में बुर्ज खलीफा पर गिरा मिसाइल? जानें वायरल हो रहे वीडियो की पूरी सच्चाई

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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