डॉक्टर गरीब मरीज को BiPAP मशीन लगाते हुए
One Rupee Ventilator Service Odisha: जब भी किसी मरीज की सांसें उखड़ने लगती हैं और उसे वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, तो एक गरीब परिवार की रातों की नींद उड़ जाती है. प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट का खर्च रोजाना 10,000 से 30,000 रुपये तक बैठता है, जो किसी भी गरीब इंसान की जेब पूरी तरह खाली कर देता है. लेकिन ओडिशा के संबलपुर जिले के बुर्ला क्षेत्र में एक ऐसे डॉक्टर हैं, जो गरीबों के लिए ‘साक्षात मसीहा’ बनकर सामने आए हैं.
संबलपुर के मशहूर डॉ. शंकर रामचंद्रानी ने गंभीर सांस की बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए मात्र 1 रुपये की टोकन फीस में BiPAP वेंटिलेटर सेवा (BiPAP Ventilator Service) की शुरुआत की है.
वीर सुरेंद्र साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (VIMSAR) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. शंकर रामचंद्रानी ने बताया कि जो मरीज डॉक्टर की सलाह पर घर पर ही रेस्पिरेटरी सपोर्ट (सांस की मशीन) लेना चाहते हैं, वे भी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. डॉ. रामचंद्रानी ने कहा कि अगर कोई गरीब मरीज इस BiPAP वेंटिलेटर सुविधा के लिए प्राइवेट अस्पताल जाता है, तो उसे 20,000 से 30,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं.
लेकिन हमारी क्लिनिक में यह बेहद खर्चीली और जीवनरक्षक मशीन गरीब मरीजों को सिर्फ 1 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी. भारत में शायद पहली बार इतनी सस्ती दर पर यह सुविधा दी जा रही है.
डॉ. रामचंद्रानी संबलपुर में ‘वन रुपी डॉक्टर’ (One Rupee Doctor) के नाम से पूरे इलाके में प्रसिद्ध हैं. उन्होंने 12 फरवरी 2021 को अपनी स्वर्गीय मां लाजवंती की पावन स्मृति में बुर्ला में ‘वन रुपी क्लिनिक’ (One Rupee Clinic) की शुरुआत की थी. शुरुआत में वे सिर्फ 1 रुपये में मरीजों को डॉक्टरी सलाह (कंसल्टेशन) देते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सेवाओं का विस्तार किया. अब तक इस क्लिनिक के माध्यम से 1.56 लाख से भी अधिक गरीब और बेसहारा मरीजों का सफलता पूर्वक इलाज किया जा चुका है.
अस्पताल में वेंटिलेटर की भारी कमी को देखते हुए डॉ. रामचंद्रानी ने अपने निजी खर्च से करीब 1-1 लाख रुपये कीमत की 4 BiPAP वेंटिलेटर मशीनें खरीदी हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में ऐसी और मशीनें लाने का है. बरगढ़ के सोहेला क्षेत्र के रहने वाले 49 वर्षीय सुनया बाग इस योजना का लाभ उठाने वाले पहले मरीज बने.
गंभीर बीमारी से पीड़ित सुनया बाग ने भावुक होकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में हमेशा वेंटिलेटर खाली नहीं मिलता और प्राइवेट में रोज का खर्च 10,000 रुपये से ज्यादा आता है. हमारे जैसे गरीबों के लिए डॉ. रामचंद्रानी किसी भगवान से कम नहीं हैं.”
डॉ. शंकर रामचंद्रानी ने वेंटिलेटर सेवा शुरू करने के पीछे की अपनी व्यक्तिगत प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि उनकी मां भी सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं. उन्होंने अपनी मां को सांस लेने के लिए तड़पते और उस संघर्ष को काफी करीब से देखा
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आज के दौर में जहां डॉक्टरी का पेशा कई जगहों पर भारी-भरकम व्यावसायिक रूप ले चुका है, वहीं डॉ. शंकर रामचंद्रानी की यह निस्वार्थ जनसेवा (One Rupee Ventilator Service Odisha) समाज और देश के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है. बुर्ला स्थित उनकी ‘वन रुपी क्लिनिक’ न केवल संबलपुर बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के गरीब मरीजों के लिए एक बहुत बड़ा संबल और नई जिंदगी की उम्मीद बन चुकी है.
-भारत एक्सप्रेस
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