भारत के चर्चित सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा हो गया है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए इस ऑपरेशन को सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति में आए बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. इस मौके पर सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) अनुज माथुर ने खुलकर कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी.
मेजर जनरल अनुज माथुर का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई “स्ट्रैटेजिक सोच” का साफ संकेत था. उनके मुताबिक अब देश सिर्फ किसी हमले के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पहले से कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति भी दिखा रहा है. उन्होंने इसे भारत की डिफेंस पॉलिसी में एक अहम मोड़ बताया.
उन्होंने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि आज का युद्ध पहले जैसा बिल्कुल नहीं रहा. अब सीमाओं पर सिर्फ सैनिकों की तैनाती या पारंपरिक हथियारों की बात नहीं है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर अटैक, सैटेलाइट निगरानी और सूचना युद्ध (information warfare) सबसे बड़ा रोल निभा रहे हैं. उनके मुताबिक आने वाले समय में जंगें “मिसाइलों से पहले डेटा और टेक्नोलॉजी” के जरिए लड़ी जाएंगी.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बेहतरीन समन्वय को उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि बताया. उनका कहना है कि भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियान (joint warfare) किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सर्विलांस सिस्टम और सटीक हमले (precision strikes) ने भारत की सैन्य क्षमता को नई दिशा दी है.
इसी बातचीत में उन्होंने मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव पर भी चिंता जताई. खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों पर तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि आज के समय में समुद्री शक्ति, ड्रोन तकनीक और साइबर क्षमता किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हो गई है.
मेजर जनरल माथुर ने एक अहम बात यह भी कही कि आज के दौर में फर्जी खबरें और प्रोपेगैंडा भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में आम नागरिकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे किसी भी जानकारी को बिना जांचे साझा न करें और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें.
ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर उन्होंने साफ कहा कि किसी भी देश की ताकत सिर्फ उसके हथियार नहीं होते, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, स्पष्ट रणनीति और तैयार सेना मिलकर उसे मजबूत बनाते हैं. अंत में उन्होंने युवाओं से अनुशासन, देशभक्ति और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की अपील की, और कहा कि देश की सुरक्षा सिर्फ सेना की नहीं, हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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