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हिरणी को बेटी की तरह पाला, मेहंदी लगाकर दी विदाई, फलोदी के परिवार ने पेश की इंसानियत की मिसाल

रिपोर्ट – प्रदीप जोशी


Rajasthan Deer Rescue: राजस्थान के फलोदी जिले के इस्लामनगर गांव से इंसान और वन्यजीव के बीच प्रेम, करुणा और संवेदनशीलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. यहां एक परिवार ने घायल हिरणी को न केवल बचाया, बल्कि तीन महीनों तक उसे अपने बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया और स्वस्थ होने पर पूरे सम्मान के साथ उसके प्राकृतिक आवास में विदा किया.

करीब तीन माह पहले इस्लामनगर गांव निवासी इलियास खान को एक हिरणी आवारा श्वानों के हमले में गंभीर रूप से घायल और डरी-सहमी अवस्था में मिली थी. उन्होंने बिना देर किए हिरणी को अपने घर ले जाकर उसका उपचार और देखभाल शुरू की. धीरे-धीरे हिरणी स्वस्थ होने लगी और परिवार के साथ इतनी घुल-मिल गई कि घर के सदस्य उसे अपने परिवार का हिस्सा मानने लगे.

बच्चे की तरह स्नेह से पाला

परिवार के लोगों ने उसे बच्चे की तरह स्नेह दिया. घर के आंगन में खेलती-कूदती हिरणी सभी की चहेती बन गई. तीन महीनों तक प्रेम और ममता से उसका पालन-पोषण किया गया, जिससे वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई.

जब हिरणी अपने प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए सक्षम हो गई तो परिवार ने उसे वापस जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया. इस कार्य में पूर्व पंचायत समिति सदस्य ओमदान चारण ने पहल करते हुए वन विभाग से संपर्क किया और हिरणी को सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ने की व्यवस्था करवाई.

बहुत भावुक रही विदाई

हिरणी की विदाई का दृश्य बेहद भावुक था. परिवार की महिलाओं ने उसे बेटी की तरह सजाया-संवारा, उसके पैरों में मेहंदी लगाई और नम आंखों से विदा किया. वन विभाग की टीम को हिरणी सौंपते समय परिवार के कई सदस्य अपने आंसू नहीं रोक सके.

इस अवसर पर वन विभाग की टीम के साथ कैलाशदान चारण, बबलू चौधरी, रामचंद्र, हमले खान, हानू खान और नवाब खान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. सभी ने इलियास खान और उनके परिवार की इस संवेदनशील पहल की सराहना की.

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ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जीवों के प्रति दया, प्रेम और मानवता का ऐसा उदाहरण दुर्लभ है. इस्लामनगर के इस परिवार ने यह साबित कर दिया कि करुणा और संवेदनशीलता की कोई सीमा नहीं होती. यही वजह है कि इस अनूठी कहानी की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है और लोग परिवार की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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