फाइल फोटो- IANS
महान संगीतकार, गायक, गीतकार और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा समेत देश के कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर डॉ. भूपेन हजारिका को नमन करते हुए लिखा
“महान डॉ. भूपेन हज़ारिका को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रहा हूं. उनकी आवाज में असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना समाई थी, जिसे उन्होंने पूरे देश तक पहुंचाया. अपने संगीत के ज़रिए उन्होंने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को बहुत खूबसूरती से व्यक्त किया. उनके गानों ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया. मुझे पिछले साल गुवाहाटी में उनकी जन्म शताब्दी समारोह की शुरुआत में शामिल होने का सुखद अनुभव याद है. भूपेन दा का जीवन और काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा
“ब्रह्मपुत्र के गायक (बार्ड ऑफ द ब्रह्मपुत्र), भारत रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि. भूपेन दा के संगीत ने असमिया संस्कृति को उसकी तमाम विविधताओं के साथ विश्व मंच पर पहुंचाया और उनके गीतों ने उस भावना को दर्शाया जिसने समाज को सदियों से एकजुट रखा है. उनकी अमर विरासत राष्ट्र-निर्माण के हमारे विज़न को प्रेरित करती रहेगी.”
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने डॉ. भूपेन हजारिका के बहुआयामी योगदान को रेखांकित करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा
“भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि. एक महान संगीतकार, कवि, गीतकार, फिल्म निर्माता और सांस्कृतिक दूरदर्शी के रूप में, डॉ. भूपेन हजारिका ने अपनी कालजयी रचनाओं से भारतीय कला और साहित्य को समृद्ध किया. उनकी ये रचनाएं मानवता, एकता और असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भावना से गहराई से जुड़ी हुई हैं. भारत की सांस्कृतिक दुनिया में उनके असाधारण योगदान ने देश भर की पीढ़ियों को प्रेरित किया है और आगे भी करता रहेगा.”
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा
“डॉ. भूपेन हजारिका सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक ऐसी भावना हैं जो असम के दिल और रूह में बसी है. उनका सदाबहार संगीत और गहरे अर्थ वाले बोल पीढ़ियों को प्रेरित करते रहे हैं. उनके जीवन और कालजयी रचनाओं के लिए पूरे देश में साल भर चले समारोहों ने ‘ब्रह्मपुत्र के गायक’ (बार्ड ऑफ द ब्रह्मपुत्र) की उस अमिट विरासत को फिर से स्थापित किया है, जिनकी आवाज़ ने असम की आत्मा, कहानियों और सपनों को राज्य की सीमाओं से बहुत दूर तक पहुंचाया. उनकी जयंती पर, मैं महान ‘सुधाकंठ’ को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.”
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