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मन की बात @135: पीएम मोदी ने ‘हरगिला’ के संरक्षण के लिए पूर्णिमा देवी बर्मन को सराहा

पीएम ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में असम के दुर्लभ पक्षी ‘हरगिला’ (ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क) और उसके संरक्षण की प्रेरक कहानी देशवासियों के साथ साझा की. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था, जब असम के कुछ इलाकों में इस पक्षी को अशुभ माना जाता था, लेकिन लोगों की सोच बदलने के प्रयासों ने आज इसे गांवों की पहचान बना दिया है.

अशुभ मानने की गलत धारणा को पूर्णिमा देवी ने सूझबूझ से बदला

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरगिला एक बेहद दुर्लभ पक्षी है, जो प्रकृति को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके बावजूद लंबे समय तक लोगों के मन में इसे लेकर गलत धारणाएं बनी रहीं. लोग इस पक्षी को अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे; यहां तक कि जिन पेड़ों पर हरगिला अपने घोंसले बनाता था, उन्हें भी काट दिया जाता था.

पीएम मोदी ने बताया कि इसी दौरान जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने यह स्थिति देखी और लोगों की सोच बदलने का संकल्प लिया. पूर्णिमा देवी ने सबसे पहले महिलाओं से संवाद किया और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर लोगों को समझाया कि हरगिला पर्यावरण के लिए कितना महत्वपूर्ण है. धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ती गईं और फिर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर गांवों से दूर भगाया जाता था, वही आज कई गांवों की पहचान और गर्व का प्रतीक बन चुका है. प्रधानमंत्री ने इस प्रयास को समाज में जागरूकता और सामूहिक भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया.

अकेले असम में है 80% आबादी

बता दें कि हरगिला दुनिया के सबसे दुर्लभ और विशाल सारस प्रजातियों में से एक है. इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों ‘हड’ (हड्डी) और ‘गिला’ (निगलना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ ‘हड्डी निगलने वाला पक्षी’ है. यह मुख्य रूप से भारत के असम और कंबोडिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है. वैश्विक स्तर पर इस पक्षी की करीब 80 प्रतिशत आबादी अकेले असम में रहती है.

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पारिस्थितिकी तंत्र का रक्षक: प्राकृतिक सफाईकर्मी है ‘हरगिला’

हरगिला एक मांसाहारी और मृतभक्षी (स्कैवेंजर) पक्षी है. यह सड़े-गले मांस, मरे हुए जीवों और कचरे को खाकर प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाता है. साथ ही, यह आर्द्रभूमि (वेटलैंड) और जलाशयों के आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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