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मालपुआ नहीं परोसा तो गांव में मचा बवाल! अंतिम संस्कार के भोज में शामिल हुए 42 परिवारों का हुआ सामाजिक बहिष्कार

सिरोही के मंडवारिया गांव में एक गरीब परिवार ने मृत्युभोज में मालपुआ नहीं परोसा तो कार्यक्रम में शामिल 42 परिवारों का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया. पीड़ितों ने राशन, पानी और रोजगार से वंचित किए जाने का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

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Ajab Gajab: राजस्थान के सिरोही जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक गरीब परिवार ने अपने परिजन के निधन के बाद अंतिम संस्कार का भोज तो रखा लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पारंपरिक तौर पर परोसा जाने वाला घी का मालपुआ नहीं बनवा सका. शायद उस परिवार ने भी नहीं सोचा होगा कि इस एक फैसले की कीमत सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके साथ खड़े दर्जनों परिवारों को भी चुकानी पड़ेगी.

अब हालात ऐसे हैं कि गांव के 42 परिवार खुद को सामाजिक बहिष्कार का शिकार बता रहे हैं. उनका आरोप है कि उन्हें राशन तक नहीं दिया जा रहा, गांव के कुएं से पानी भरने से रोका जा रहा है और खेतों में मजदूरी तक नहीं मिल रही. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

आखिर क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि सिरोही जिले के बारलूट थाना क्षेत्र के मंडवारिया गांव में एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने 18 जून को अंतिम संस्कार के बाद मृत्युभोज का आयोजन किया था. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उन्होंने सादा भोजन परोसा और परंपरा के अनुसार बनाए जाने वाले घी के मालपुए का इंतजाम नहीं किया.

यही बात समुदाय के कुछ बुजुर्गों को नागवार गुजरी. आरोप है कि इसके बाद पंचायत से जुड़े कुछ लोगों ने उस कार्यक्रम में शामिल होने वाले 42 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुना दिया.

बहिष्कार के बाद बदल गई जिंदगी

प्रभावित परिवारों का कहना है कि इस फैसले के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है. उनका आरोप है कि गांव के कई दुकानदार उन्हें राशन देने से मना कर रहे हैं. सार्वजनिक कुएं से पानी भरने पर रोक लगा दी गई है और खेत मालिक उन्हें काम पर रखने से भी बच रहे हैं.

इतना ही नहीं कुछ परिवारों का दावा है कि सामाजिक बहिष्कार की वजह से वे अपने रिश्तेदारों के शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पाए. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इस बहिष्कार का उल्लंघन करता है तो उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई है.

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प्रशासन तक पहुंची शिकायत

पीड़ित परिवारों ने 20 जून को बारलूट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि शुरुआती शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद 25 जून को सभी प्रभावित परिवार जिला कलेक्टर के पास पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी. शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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