प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सोमवार को एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. संसद परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. सबसे ज्यादा सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि क्या एनसीपी (एसपी) आने वाले परिसीमन बिल पर एनडीए सरकार का साथ दे सकती है. हालांकि, पार्टी ने साफ किया है कि अभी इस मुद्दे पर किसी तरह का फैसला या समर्थन सामने नहीं आया है.
एनसीपी (एसपी) की ओर से बताया गया कि पार्टी की राष्ट्रीय नेता और लोकसभा में फ्लोर लीडर सुप्रिया सुले की अगुवाई में सांसद प्रधानमंत्री से मिले थे. पार्टी के मुताबिक, यह कोई अचानक हुई या पर्दे के पीछे की बैठक नहीं थी, बल्कि पहले से तय मुलाकात थी. इसमें सांसदों ने अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और महाराष्ट्र के कई अहम मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखा.
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा कि पार्टी के सांसदों का प्रतिनिधित्व महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में है. ग्रामीण ठाणे से लेकर विदर्भ के वर्धा तक पार्टी के सांसद अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. बैठक में इन्हीं क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया. पार्टी का कहना है कि महाराष्ट्र से संबंधित कई विषयों पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा हुई.
इस मुलाकात पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं का प्रधानमंत्री से मिलना अच्छी बात है. उनके मुताबिक, अब विपक्ष के कई नेता विकास परियोजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री के पास जा रहे हैं और उनसे बातचीत कर रहे हैं. सरनाईक ने कहा कि अगर राज्य या किसी इलाके के विकास के लिए प्रधानमंत्री के पास जाकर अपनी बात रखी जाती है और वहां से परियोजनाओं को मंजूरी या फंड मिलता है, तो इसे राजनीति से अलग नजरिए से भी देखा जाना चाहिए.
बीजेपी विधायक अमित सातम ने भी इस बैठक को लेकर किसी तरह की असामान्य स्थिति मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और ऐसे समय में अलग-अलग दलों के सांसद प्रधानमंत्री से मिलते रहते हैं. सांसद अपने क्षेत्रों और दूसरे जरूरी कामों को लेकर प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करते हैं.
सातम के मुताबिक, जब लोकसभा का सत्र चल रहा होता है तो प्रधानमंत्री संसद में मौजूद रहते हैं. ऐसे में अलग-अलग पार्टियों के नेताओं और सांसदों का उनसे मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है. इसलिए इस मुलाकात को किसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखना जरूरी नहीं है.
कांग्रेस नेता नसीम खान ने भी कहा कि किसी सांसद या प्रतिनिधिमंडल का अपने राज्य या निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े विकास के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से मिलना अपने आप में गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि सांसदों को अपने क्षेत्रों की समस्याएं केंद्र के सामने रखने का पूरा अधिकार है और इसके लिए प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रियों से मिलना स्वाभाविक प्रक्रिया है.
हालांकि, परिसीमन के मुद्दे पर नसीम खान ने एनसीपी (एसपी) से अलग उम्मीद जताई. उनका कहना है कि शरद पवार लंबे समय से शाहू, फुले और अंबेडकर की विचारधारा से जुड़े राजनीतिक रुख के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में उन्हें उम्मीद नहीं है कि शरद पवार उस बिल का समर्थन करेंगे, जिसे बीजेपी लाना चाहती है.
परिसीमन बिल को लेकर महेश तापसे ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे को पहले उठाया गया था, तब एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और इंडिया अलायंस ने इसका जोरदार विरोध किया था. लेकिन फिलहाल परिसीमन को लेकर कोई ड्राफ्ट सामने नहीं आया है.
तापसे के मुताबिक, जब बिल या उसका ड्राफ्ट औपचारिक रूप से पेश किया जाएगा, तभी उसके प्रावधानों को देखकर उस पर चर्चा की जाएगी. यानी फिलहाल प्रधानमंत्री से हुई बैठक को परिसीमन बिल पर पार्टी के रुख में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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