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ओडिशा के विकास को नई गति देने वाला ऐतिहासिक अवसर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी का मयूरभंज दौरा

PM Modi Odisha Visit: ओडिशा के मयूरभंज जिले में आज एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर देखने को मिला, जब भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गृह क्षेत्र और कर्मभूमि से जुड़े कई कार्यक्रमों में भाग लिया. दोनों नेताओं ने मयूरभंज के पहाड़पुर गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने संथाली और हो जनजातीय समुदायों के पवित्र धार्मिक स्थलों जाहेरा में पूजा-अर्चना की. इसके साथ ही उन्होंने कौशल विकास केंद्र और पहाड़पुर स्कूल का भी भ्रमण किया तथा वहां विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से संवाद किया.

इसके बाद रायरंगपुर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भाग लिया. यह आयोजन ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसका विषय था “विकास रा धारा, ओडिशा सारा”. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 47,600 करोड़ रुपये की लागत वाली अनेक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.

ओडिशा के उत्सव और सांस्कृतिक गौरव का उल्लेख

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने ओडिशा की जनता को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि हाल ही में सम्पन्न हुए राजा पर्व और आने वाली भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के कारण पूरा प्रदेश उत्सवमय वातावरण में डूबा हुआ है. विशेष रूप से मयूरभंज की प्रसिद्ध बारीपदा रथयात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की सराहना की.

प्रधानमंत्री ने ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा की सरकार होने से विकास कार्यों को नई गति मिली है. उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं, निवेश, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है.

जनजातीय संस्कृति और भाषा को सम्मान

प्रधानमंत्री ने ओडिशा की महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु, प्रसिद्ध लेखिका एवं शिक्षाविद डॉ. दमयंती बेसरा और समाजसेवी चरण हेम्ब्रम शामिल हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संथाली भाषा और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है. इसी प्रयास के तहत भारतीय संविधान का संथाली भाषा में संस्करण भी उपलब्ध कराया गया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की प्रेरणादायी यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मयूरभंज की मिट्टी से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना पूरे ओडिशा और देश के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक है.

प्रधानमंत्री ने पहाड़पुर में उनके साथ किए गए दौरे को याद करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन में स्थापित शैक्षणिक संस्थान आज आदिवासी और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आशा और प्रेरणा के केंद्र बन रहे हैं. उनकी उपस्थिति बच्चों में आत्मविश्वास और बड़े सपने देखने का साहस पैदा कर रही है.

पहाड़पुर बनेगा देश का आदर्श सोलर गांव

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि पहाड़पुर गांव को सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा. गांव के प्रत्येक घर में सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि जैसे ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर विश्व प्रसिद्ध है, उसी प्रकार पहाड़पुर भी स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा.

‘पूर्वोदय’ के माध्यम से पूर्वी भारत को नई शक्ति

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के समग्र विकास के लिए पूर्वी भारत का विकास अत्यंत आवश्यक है. इसी सोच के तहत केंद्र सरकार ‘पूर्वोदय’ नीति पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, आर्थिक गलियारे, बंदरगाह, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और आधुनिक उद्योगों में रिकॉर्ड निवेश किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि आज जिन लगभग 47 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ है, वे ओडिशा में संपर्क व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और जीवन स्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी. उनके अनुसार आने वाले वर्षों में ओडिशा पूर्वी भारत के विकास का प्रमुख प्रवेशद्वार बनकर उभरेगा.

निवेश और उद्योगों का नया केंद्र बन रहा ओडिशा

प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘उत्कर्ष ओडिशा’ अभियान के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा रहा है. इस पहल के तहत लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कई बड़ी परियोजनाएं पहले से कार्यान्वयन की प्रक्रिया में हैं.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी.

किसानों, महिलाओं और गरीबों के लिए विशेष योजनाएं

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को धान के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य दिया जा रहा है. वहीं सुभद्रा योजना के तहत एक करोड़ से अधिक महिलाओं को आर्थिक सहायता मिल रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना लागू होने से गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं. जनजातीय छात्रों के लिए माधो सिंह हाथ खर्चा योजना तथा श्री जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोलना भी सरकार की जनभावनाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

आदिवासी विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जनजातीय क्षेत्रों से पुराना जुड़ाव रहा है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी लंबे समय तक आदिवासी समाज के बीच कार्य किया है. उन्होंने स्वीकार किया कि दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है.

उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और आवास से जुड़े विभाग मिलकर जनजातीय गांवों के समग्र विकास पर कार्य कर रहे हैं.

पीएम जनमन मिशन और पीवीटीजी समुदायों का सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम जनमन मिशन की अवधारणा राष्ट्रपति मुर्मु के साथ हुई चर्चाओं से प्रेरित हुई थी. यह मिशन विशेष रूप से अत्यंत पिछड़े और कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए बनाया गया है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके घरों तक पहुंच सके.

शिक्षा और रोजगार के नए अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं तथा लगभग 750 विद्यालयों को स्वीकृति दी जा चुकी है. इसके अलावा डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है.

उन्होंने मयूरभंज जिले के लिए एक और जवाहर नवोदय विद्यालय की स्वीकृति की घोषणा भी की, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा.

स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

प्रधानमंत्री ने सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चला रही है. करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं और आदिवासी समुदायों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें निःशुल्क उपचार मिल सके.

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है.

2036 और 2047 के लक्ष्य

अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2036 में ओडिशा अपने गठन के 100 वर्ष पूरे करेगा, जबकि 2047 में भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा. उन्होंने कहा कि ओडिशा के सपने और भारत के सपने एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. एक समृद्ध और विकसित ओडिशा, विकसित भारत की नींव को और मजबूत करेगा.

योग दिवस का संदेश

प्रधानमंत्री ने 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी उल्लेख किया और कहा कि ओडिशा की भूमि ज्ञान, साधना और योग की परंपराओं से गहराई से जुड़ी रही है. उन्होंने देश और दुनिया के लोगों से बड़ी संख्या में योग दिवस में भाग लेने और योग को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया.

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मयूरभंज की धरती से प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट था कि ओडिशा अब केवल प्राकृतिक संसाधनों वाला राज्य नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के विकास का प्रमुख केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की प्रेरणा, केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास तथा जनभागीदारी के बल पर ओडिशा आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत की विकास गाथा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय लिख सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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