प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण की सराहना की है. उन्होंने भागवत के संबोधन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इसमें देश की तरक्की, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज को मजबूत बनाने जैसे अहम मुद्दों पर जोर दिया गया है. पीएम मोदी ने खास तौर पर सेवा, राष्ट्र निर्माण और संघ के ‘पंच परिवर्तन’ अभियान का जिक्र किया.
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की. उन्होंने लिखा कि नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे. मोदी के मुताबिक, भाषण में समाज को एकजुट रखने और देश को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी पहलुओं को प्रमुखता दी गई.
नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के अवसर पर परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के सशक्तिकरण सहित कई विषयों पर विस्तार से अपनी बातें रखी हैं।
सेवा और राष्ट्र निर्माण पर उन्होंने पूरा बल दिया है, जो संघ के सभी स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है।
उन्होंने पंच परिवर्तन का भी उल्लेख किया है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
@RSSorg
@DrMohanBhagwat
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— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सेवा और राष्ट्र निर्माण संघ के स्वयंसेवकों के जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं. मोहन भागवत ने भी अपने संबोधन में इन दोनों विषयों पर विशेष जोर दिया. प्रधानमंत्री ने ‘पंच परिवर्तन’ का उल्लेख करते हुए इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया.
दरअसल, नागपुर में आरएसएस के स्थापना दिवस पर हर साल विजयादशमी का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. इस बार का आयोजन संगठन के 100 साल पूरे होने के अवसर पर खास रहा. मोहन भागवत ने इस मौके पर बीते एक साल के दौरान शताब्दी समारोह के तहत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि विजयादशमी का यह आयोजन साल भर चली गतिविधियों के समापन का प्रतीक है.
अपने भाषण में मोहन भागवत ने ‘पंच परिवर्तन’ को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, राष्ट्रीय प्रगति को गति देने और लोगों के व्यवहार में सुधार करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता बताया. इस पहल के तहत पांच प्रमुख विषयों पर ध्यान देने की बात कही गई है.
इनमें सामाजिक समरसता, परिवार में अच्छे संस्कार और आपसी संवाद को बढ़ावा देना, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, अपनी संस्कृति और पहचान को समझना तथा स्वदेशी को अपनाना शामिल है. इसके साथ ही नागरिक अनुशासन को भी महत्वपूर्ण माना गया है.
भागवत का कहना था कि इन विषयों की जरूरत केवल भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देशों में भी परिवार, पर्यावरण और नागरिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. उनके मुताबिक, इन बदलावों का महत्व आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है, इसलिए इन्हें समझना मुश्किल नहीं है.
मोहन भागवत ने यह भी साफ किया कि ‘पंच परिवर्तन’ को केवल एक साल तक चलने वाले कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनका जोर इस बात पर था कि समाज में बदलाव लाने के लिए लोगों को अपने रोजमर्रा के व्यवहार में सुधार करना होगा.
उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी इन विचारों को अपने जीवन में उतारने की अपील की. मसलन, परिवार में बेहतर तालमेल बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना, समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच सद्भाव बढ़ाना और नियमों का पालन करना ऐसे कदम हैं, जिनसे बदलाव की शुरुआत घर और आसपास से हो सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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