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‘संविधान हत्या दिवस’ पर पीएम मोदी का महासंकल्प: न्याय, समानता और बंधुत्व से सरेगा नए भारत का सपना

PM Modi on Samvidhan Hatya Diwas: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन भारत के इतिहास के उस दौर की याद दिलाता है, जब लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों पर गंभीर आघात हुआ था. उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती थी.

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों को नमन किया, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में कई लोगों ने दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. ऐसे लोगों का साहस और समर्पण आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

संविधान को बताया देश की आकांक्षाओं का प्रतीक

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के अधिकारों, कर्तव्यों और सपनों का आधार है. उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. देश को आगे बढ़ाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है.

न्याय, स्वतंत्रता और समानता वाले भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश संविधान की भावना के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ऐसा राष्ट्र बनेगा, जहां न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श सर्वोच्च रहेंगे. उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने का भी आह्वान किया.


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स्वतंत्रता के महत्व पर दिया संदेश

अपने संदेश में पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जिसमें स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया गया है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही व्यक्ति को सुख, शांति और सर्वोच्च उपलब्धियों तक पहुंचने का मार्ग दिखाती है. इसी भावना के साथ देश को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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