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Gujarat: पीएम मोदी के गांव में हरियाली की नई कहानी, हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की बड़ी पहल, लगाए गए हजारों दुर्लभ पौधे

पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक इकोसिस्टम के पुनर्जीवन के उद्देश्य से पीएम मोदी के गांव वडनगर शहर को हरित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है.

पीएम के गांव में बड़े पैमाने पर पौधरोपण

तेलंगाना राज्य के हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सहयोग से वडनगर की आठ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है. इनमें तोरण होटल, लटेरी वाव, अंबाजी कोठा झील और विष्णुपुरी झील सहित अन्य स्थान शामिल हैं, जहां रुद्राक्ष, महोगनी, गोल्डन बैम्बू जैसी दुर्लभ प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए गए हैं.

पीएम मोदी का अभियान- एक पेड़ मां के नाम

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के अहमदाबाद जोनल कॉर्डिनेटर केजल कंसारा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल है. जिस तरह हमारी जननी मां हमें जीवन देती है, उसी प्रकार धरती मां भी हमें पोषित करती है. पेड़ इस सृष्टि के अभिन्न अंग हैं, जो न केवल पृथ्वी को जीवनदायी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण के संतुलन को भी बनाए रखते हैं. पेड़ सूर्य का प्रकाश, पानी और पोषण लेकर बदले में हमें फल, छाया और शुद्ध हवा देते हैं, साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं. ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से हम प्रकृति को कुछ लौटाने का भाव विकसित कर सकते हैं और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इसी सोच के साथ इस अभियान को सही दिशा में आगे बढ़ा रहा है.

50 हजार पौधे लगाए गए

केजल कंसारा ने बताया कि वडनगर में इस अभियान की शुरुआत विष्णुपुरी तालाब से की गई थी और इसके लिए कुल आठ साइट्स उपलब्ध कराई गईं. ये सभी स्थान ऐतिहासिक और पुरातात्विक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं. वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली होने के साथ-साथ कर्मस्थली भी है, जिससे यहां किए जा रहे पर्यावरणीय प्रयासों का महत्व और बढ़ जाता है. अब तक यहां लगभग 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं और यह कार्य अभी भी जारी है. इन पौधों के संरक्षण और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उनका विकास सुनिश्चित हो सके.

क्या है पौधे से पेड़ बनने तक की प्रक्रिया

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के वॉलंटियर डॉ. आदित्य चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा दी गई आठ साइट्स पर इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने का दायित्व संस्थान को सौंपा गया है. इसके तहत झीलों के आसपास रेन फॉरेस्ट प्लांटेशन किया जा रहा है. पौधरोपण के बाद इन स्थलों का कम से कम तीन वर्षों तक रखरखाव किया जाता है. जब तीन साल बाद पेड़ों का विकास हो जाता है और इकोसिस्टम में संतुलन स्थापित हो जाता है, तब इन स्थलों को स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया जाता है. इस पूरे कार्य में गुजरात सरकार की ओर से सुरक्षा, जल आपूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा सहयोग मिलता है.

उन्होंने आगे बताया कि पौधे हैदराबाद से लाए जाते हैं और इन्हें लगाने की एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है. पौधों के लिए तीन फीट गहरी पिटिंग की जाती है, जिसे सात से दस दिनों तक अनुकूलन के लिए छोड़ा जाता है. इसके बाद उसमें एक्टिवेटेड चारकोल, कोकोपिट और मिट्टी का मिश्रण डाला जाता है. पिट में वर्मी कम्पोस्ट और नीम केक मिलाने के बाद पौधरोपण किया जाता है और ड्रिप इरिगेशन के जरिए पानी दिया जाता है. अब तक लगाए गए करीब 50 हजार पौधों का विकास अच्छी तरह से हो रहा है, जिससे यह साबित होता है कि इस तरह का वैज्ञानिक पौधरोपण इकोसिस्टम के पुनर्जीवन के लिए बेहद प्रभावी है.


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उल्लेखनीय है कि इन पौधों को ड्रिप इरिगेशन और रेन गन जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पानी देकर बड़ा किया जा रहा है, ताकि उनका स्वस्थ विकास सुनिश्चित किया जा सके. पेड़ों के सही ढंग से पनपने पर ही वे पर्यावरण को स्वच्छ और संतुलित बनाने के उद्देश्य को पूरा कर सकेंगे. वडनगर में किया जा रहा यह पौधरोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और ‘ग्रीन गुजरात, ग्रीन इंडिया’ के संकल्प को भी साकार कर रहा है.

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट का यह प्रयास इस बात की मिसाल बनकर सामने आया है कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से प्राकृतिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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