Journey of Jewar Airport: साल 1996 में हुए चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश के संसदीय इतिहास में चले ‘युद्धकाल’ का आखिरी दौर था. कल्याण सिंह के बाद राजनीति से रिटायर हो चुके रामप्रकाश गुप्ता बतौर मुख्यमंत्री सत्ता संभाल रहे थे. हालांकि, उनकी तबीयत में शिथिलता के कारण उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी. उनके स्थान पर दिल्ली से उन दिनों वाजपेयी सरकार ने केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह को लखनऊ भेजा गया. 28 अक्टूबर साल 2000 को राजनाथ मुख्यमंत्री बनते हैं. हालांकि, 1 साल 131 दिनों में उनकी सरकार गिर जाती है. इसी के साथ टूटने की कगार पर आ जाता है एक सपना जिसे राजनाथ सिंह ने 2001 में देखा था. वो सपना था जेवर में एक आलीशान एयरपोर्ट बनाने का अब यह सपना साकार हो चुका है. आइये जानें इतिहास में यह किन-किन पड़ावों के जरिये यहां तक पहुंचा है.
राजनाथ की सरकार गिरने से पहले यह प्रोजेक्ट केंद्र के पास पहुंच गया था लेकिन तब से लेकर इस प्रोजेक्ट ने 3 प्रधानमंत्री और 6 मुख्यमंत्रियों के राज को देख लिया. सियासी दांव पेंच में ये करीब 21 सालों तक अंटका रहा. साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी. इसके बाद अब कहीं 23 साल बाद वो सपना साकार हो पाया है. 28 मार्च 2026 को नोएडा के इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport inauguration 2026) को पीएम मोदी ने देश के हवाले किया. हालांकि, यह प्रोजेक्ट कई सियासी खेलों का गवाह रहा है. आइये जानें राजनाथ सिंह का सपना आखिरकार कैसे साकार हुआ और यह अलग-अलग सरकारों में कैसे फाइलों में सालों घूमता रहा?
28 अक्टूबर 2000 को मुख्यमंत्री बने राजनाथ सिंह ने वर्ष 2001 में जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा, उस समय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे. हालांकि, 2002 में उनकी सरकार गिर गई. अगले चुनाव के बाद भाजपा के समर्थन से मायावती मुख्यमंत्री बनीं लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी से यह प्रोजेक्ट अटका रह गया. हालांकि, 2003 में उनकी सरकार गिर गई, और मुलायम सिंह यादव सत्ता में आए. मुलायम सिंह ने जेवर के बजाय आगरा के आसपास एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा, जिससे इसमें और अड़चन आने लगी.
मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में जेवर एयरपोर्ट को लेकर केंद्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के कारण प्रोजेक्ट फंसता रहा. केंद्र को BSP और SP दोनों समर्थन दे रहे थे. ऐसे में धर्मसंकट में फंसी केंद्र सरकार ने सपा सरकार की मांग को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 100 किमी के दायरे में होने का हवाला देकर एयरपोर्ट पर रोक लगा दी. इसके बाद अखिलेश यादव आए और उन्होंने हिरण गांव में शिफ्ट कर बजट भी जारी किया. हालांकि, केंद्र ने इसपर रोक लगा दी.
2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जेवर एयरपोर्ट को राज्य का ड्रीम प्रोजेक्ट घोषित किया गया. गौतमबुद्ध नगर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने विधानसभा की पहली बैठक में इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की मांग की, जिसे मुख्यमंत्री ने तुरंत मंजूर कर लिया. योगी सरकार की सक्रियता से यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ा और जेवर एयरपोर्ट अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास का प्रतीक बन गया है.
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जेवर हवाई अड्डा विकास योजना उत्तर प्रदेश और देश के परिवहन ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक महत्वाकांक्षी कदम है. चार चरणों में विभाजित यह योजना हवाई यातायात को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से तैयार की गई है. भले ही ये राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में देखा गया ये सपना कुछ समय के लिए साकार नहीं हो पाया लेकिन इस हवाई अड्डे का विस्तृत मास्टर प्लान भविष्य के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा.
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