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नीतीश-तेजस्वी को टेंशन? PK ने तैयार किया नया ‘सियासी हब’, नाम रखा ‘बिहार नव निर्माण आश्रम’

रिपोर्ट- धर्मेंद्र आनंद


बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की सक्रिय राजनीति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं. इस चुनाव में जन सुराज अभियान को कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल सकी और पार्टी एक भी सीट जीतने में असफल रही, जिसके बाद इसके राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल उठने लगे थे. कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी हार के बाद जन सुराज की गतिविधियों में सुस्ती देखी गई और उसके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं. हालांकि अब प्रशांत किशोर एक बार फिर नए सिरे से अपनी रणनीति को धार देने की तैयारी में हैं.

प्रशांत किशोर का नया आश्रम

प्रशांत किशोर ने पटना से सटे बिहटा के अमहारा गांव में लगभग 20 बीघा जमीन लीज पर ली है, जहां एक बड़ा राजनीतिक और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जा रहा है. इस स्थान को उन्होंने “बिहार नव निर्माण आश्रम” नाम दिया है. यह केंद्र आने वाले समय में उनकी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक ढांचे का मुख्य आधार बनने जा रहा है.

बताया जा रहा है कि यह आश्रम आईआईटी पटना के नजदीक एक आम के बागान में तैयार हो रहा है, जहां प्राकृतिक वातावरण के बीच टेंट आधारित छोटे-छोटे आवास बनाए जा रहे हैं. यहां कार्यकर्ताओं के रहने, प्रशिक्षण और भोजन की पूरी व्यवस्था एक ही परिसर में की जा रही है. अनुमान है कि यहां लगभग दो हजार कार्यकर्ताओं के रुकने और प्रशिक्षण लेने की सुविधा विकसित की जाएगी.

29 मई को शुरू होगा

सूत्र यह भी बताते हैं कि 29 मई से यहां स्थानीय मुद्दों पर संवाद और मीडिया से बातचीत की शुरुआत की जाएगी. यह स्थान केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक राजनीतिक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जहां आगामी वर्षों में संगठनात्मक विस्तार और रणनीति निर्माण पर फोकस रहेगा.


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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम प्रशांत किशोर की सक्रिय राजनीति में नए चरण की शुरुआत हो सकता है. जन सुराज अभियान को फिर से मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया केंद्र बिहार की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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