2024 के लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस एक बार फिर संगठनात्मक बदलाव की राह पर है. पार्टी की रणनीति अब उन राज्यों पर केंद्रित है जहां आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसी सिलसिले में कांग्रेस असम, तमिलनाडु, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की प्रदेश इकाइयों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है.
यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब पार्टी बिहार और केरल में पहले ही नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर चुकी है. जानकार मानते हैं कि यह फेरबदल न केवल नेतृत्व को नया रूप देगा, बल्कि पार्टी के अंदर के आंतरिक समीकरणों और चुनावी रणनीति को भी नया आकार देगा.
असम में सबसे ज्यादा चर्चा लोकसभा सांसद और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई को लेकर है. पार्टी सूत्रों के अनुसार उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष या अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने पर विचार हो रहा है.
गौरव गोगोई, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र हैं, और उनकी छवि एक ईमानदार, संयमी और प्रभावी वक्ता की रही है.
हालिया समय में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा और गोगोई के बीच जुबानी जंग तेज़ हुई है. शर्मा ने उन पर निजी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें कांग्रेस ने बेबुनियाद बताया.
पार्टी के अंदर इसे इस रूप में देखा जा रहा है कि गोगोई भाजपा के लिए एक उभरते हुए चुनौती बन चुके हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि गोगोई राज्य में एक व्यक्तित्व-आधारित राजनीतिक विमर्श को जन्म दे सकते हैं, जो भाजपा की आक्रामक रणनीति के विरुद्ध संतुलन बना सके.
तमिलनाडु कांग्रेस भी बदलाव की दहलीज़ पर खड़ी है. मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थगई की नियुक्ति को कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन पार्टी के भीतर एक वर्ग जोथिमनी को अगला प्रदेश अध्यक्ष बनाने की वकालत कर रहा है.
करूर से लोकसभा सांसद जोथिमनी, युवाओं और महिला नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं. पार्टी उन्हें एक जमीनी नेता और दक्षिण भारत में कांग्रेस की आधुनिक आवाज के तौर पर देख रही है. आगामी विधानसभा चुनावों में DMK गठबंधन के साथ तालमेल को बेहतर करने में भी वे उपयोगी मानी जा रही हैं.
हरियाणा में स्थिति सबसे जटिल मानी जा रही है. यहां वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष उदय भान के कार्यकाल में पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद से अब तक कांग्रेस CLP नेता तक तय नहीं कर सकी है, जिससे नेतृत्व पर असमंजस बना हुआ है. हालांकि, राज्य प्रभारी के तौर पर हाल ही में बीके हरिप्रसाद की नियुक्ति हुई है सूत्रों का मानना है कि जल्द ही नए अध्यक्ष की घोषणा की जा सकती है.
हिमाचल प्रदेश में प्रतिभा सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी, PCC अध्यक्ष हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी. हालांकि, हाल के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी, जिससे नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्य में संगठन को दोबारा सक्रिय करने और युवा नेतृत्व को तरजीह देने की आवश्यकता है. संभव है कि यहां भी जल्द कोई नया चेहरा सामने आए.
कांग्रेस के इन संभावित बदलावों को एक नई रणनीतिक दिशा के रूप में देखा जा रहा है. गौरव गोगोई और जोथिमनी जैसे नेता न सिर्फ नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि भाजपा के खिलाफ एक वैकल्पिक नैरेटिव खड़ा करने में भी सक्षम माने जा रहे हैं. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आते जाएंगे, कांग्रेस का यह पुनर्गठन उसे जमीनी स्तर पर मजबूती देने की दिशामें निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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