राजस्थान की शांत और वीरों की भूमि अब गैंगस्टर्स के खूनी खेल का अखाड़ा नहीं रहेगी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ कर दिया है कि राजस्थान अब संगठित अपराध के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून RACOCA (Rajasthan Control of Organised Crime Act) अपनाने जा रहा है.
पिछले कुछ वर्षों में गोगामेड़ी और राजू ठेहट जैसे हत्याकांडों ने प्रदेश की छवि को जो चोट पहुँचाई है, उसका हिसाब अब ‘राकोका’ के जरिए चुकता किया जाएगा. 10 अप्रैल, 2026 को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को खुली छूट देते हुए संकेत दिए हैं कि अब अपराधियों का पनाहगाह केवल जेल की कालकोठरी होगी.
पिछले कुछ समय में राजस्थान ने ऐसे अपराध देखे हैं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया:
सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड (जयपुर): दिसंबर 2023 में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष की उनके घर में घुसकर सरेआम हत्या कर दी गई. इस घटना ने साबित किया कि गैंगस्टर्स के हौसले कितने बुलंद हैं.
राजू ठेहट मर्डर (सीकर): सीकर के कोचिंग हब में दिन-दहाड़े हुई इस हत्या और उसके बाद सोशल मीडिया पर ली गई जिम्मेदारी ने राजस्थान में ‘गैंगवार’ की कड़वी हकीकत को सामने रखा.
जालोरी गेट (जोधपुर) और अन्य शहरों में फिरौती: अब छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े बिल्डरों तक को लॉरेंस बिश्नोई, रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ के नाम से धमकियाँ मिलना आम हो गया है. सोशल मीडिया पर इन गैंग्स के लाखों फॉलोअर्स होना पुलिस के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया है.
राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई, रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ जैसे गैंगस्टर्स ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी जो ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि बनाई है, उसे सरकार अब कानूनी ‘ब्रह्मास्त्र’ से ध्वस्त करेगी. गोगामेड़ी हत्याकांड जैसी घटनाओं ने यह साफ कर दिया था कि पुराने कानून इन संगठित नेटवर्क को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे थे. ‘राकोका’ के लागू होते ही, इन गैंग्स के न केवल शूटर्स बल्कि उन्हें शरण देने वाले और सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ करने वाले ‘स्लीपर सेल्स’ पर भी नकेल कसी जाएगी.
महाराष्ट्र के ‘मकोका’ (MCOCA) की तर्ज पर बना यह कानून अपराधियों के लिए मौत का वारंट साबित होगा. इसके मुख्य बिंदु आपकी धड़कनें बढ़ा सकते हैं:
कन्फेशन की कानूनी मान्यता: इस कानून के तहत एसपी (SP) रैंक के अधिकारी के सामने दिया गया बयान ही कोर्ट में सबूत माना जाएगा, जिससे अपराधियों का बचना नामुमकिन होगा.
30 दिन की लंबी रिमांड: सामान्यतः पुलिस को कुछ ही दिनों की रिमांड मिलती है, लेकिन ‘राकोका’ में 30 दिनों तक पुलिस अपराधी से सच उगलवा सकेगी.
फांसी और उम्रकैद: यदि संगठित अपराध में किसी निर्दोष की जान जाती है, तो इसमें सीधा फांसी की सजा का प्रावधान है.
प्रॉपर्टी होगी मिट्टी: अब अपराध से ‘ऐश’ करना पड़ेगा भारी
गैंगस्टर्स अक्सर अपराध से कमाई गई दौलत के दम पर अपना रसूख बनाए रखते हैं. लेकिन ‘राकोका’ के तहत सरकार को यह शक्ति मिलेगी कि वह अपराधी की चल-अचल संपत्ति को तुरंत कुर्क (Seize) कर सके. यानी अब गैंगस्टर बनकर आलीशान जिंदगी जीने का सपना देखने वालों के घरों पर बुलडोजर चलना तय है. सरकार का मानना है कि जब आर्थिक कमर टूटेगी, तो गैंग्स का नेटवर्क अपने आप ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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