देश

इंजीनियरिंग छोड़ी, कैमरा थामा और रच दिया इतिहास: नहीं रहे पद्म श्री फोटो पत्रकार रघु राय, नई पीढ़ी के लिए छोड़ गए एक महान विरासत

Raghu Rai Passes Away: आज भारतीय पत्रकारिता और कला जगत के लिए एक बेहद भारी दिन है. भारत के सबसे दिग्गज और मशहूर फोटो पत्रकार रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे. रविवार को 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके परिवार ने इस खबर की पुष्टि की है. यह कहना गलत नहीं होगा कि आज भारत ने अपनी ‘तीसरी आंख’ खो दी है वह आंख जिसने आधी सदी से भी ज्यादा समय तक इस देश के बदलते चेहरों, इसकी चीखों, मुस्कुराहटों और संघर्षों को दुनिया के सामने रखा.

मिट्टी से कैमरे तक का सफर

1942 में झंग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय की शुरुआत किसी आर्टिस्ट के तौर पर नहीं हुई थी. बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने पिता के कहने पर सिविल इंजीनियर की पढ़ाई की थी, लेकिन वे इसे बेहद उबाऊ मानते थे. एक-दो साल नौकरी करने के बाद उन्होंने काम छोड़ दिया और अपने भाई पॉल के पास चले गए, जो एक फोटोग्राफर थे. वहीं उन्हें फोटोग्राफी का चस्का लगा.

फोटोग्राफी की दुनिया में उनका आना भी एक इत्तेफाक था. अपने भाई के साथ गांव के दौरे पर उन्होंने एक नन्हे गधे की प्यारी सी तस्वीर खींची. भाई ने उस फोटो को लंदन के ‘द टाइम्स’ को भेज दिया और वह आधे पन्ने पर छप गई. बस, यहीं से उन्हें लगा कि उन्हें फोटोग्राफर ही बनना चाहिए.

1966 में वे ‘द स्टेट्समैन’ अखबार में चीफ फोटोग्राफर बने. इसके बाद उन्होंने ‘संडे’ और ‘इंडिया टुडे’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अपनी फोटोग्राफी के जरिए विजुअल स्टोरीटेलिंग की एक नई भाषा गढ़ी. उनके लिए फोटोग्राफी सिर्फ एक क्लिक नहीं थी, बल्कि एक पल को इतिहास बना देने और बिना कुछ कहे उसके पीछे की कहानी कह देने की कला थी.

जब दुनिया ने माना लोहा

रघु राय की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के सबसे महान फोटोग्राफरों में शुमार हेनरी कार्टियर-ब्रेसन ने खुद 1977 में उन्हें मैग्नम फोटोज (Magnum Photos) के लिए नामांकित किया था. बता दें कि यह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी एजेंसी है और इसमें शामिल होना किसी भी फोटोग्राफर के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है.

इतिहास के गवाह: भोपाल से बांग्लादेश तक

रघु राय का काम केवल सुंदर तस्वीरों तक सीमित नहीं था. वे एक साहसी पत्रकार भी थे.

भोपाल गैस त्रासदी (1984): उनकी खींची गई तस्वीरें आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं. उस त्रासदी के दर्द को उन्होंने जिस गहराई से कैद किया, उसने दुनिया को हिलाकर रख दिया और लोगों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी थी.

बांग्लादेश शरणार्थी संकट (1971): इस युद्ध के दौरान उनकी फोटोग्राफी ने उन्हें भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ दिलाया. वे पहले ऐसे फोटोग्राफर थे जिन्हें उनके काम के लिए यह सम्मान मिला.

रघु राय मानते थे कि पत्रकारिता में अपनी जगह खुद बनानी पड़ती है. वे अक्सर अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहते थे- “कोई आपको जगह तब तक नहीं देता, जब तक आप अपनी अभिव्यक्ति की ताकत (Power of expression) से उस पर दावा न ठोकें.”

काम के लिए पूरी तरह समर्पित

रघु राय का काम के प्रति जुनून ऐसा था कि वे स्पेस के मोहताज नहीं थे. वे अक्सर याद करते थे कि जब संपादक उन्हें किसी छोटी खबर के लिए फोटो लाने को कहते, तो वे उस असाइनमेंट को भी इतनी शिद्दत से शूट करते कि अंत में संपादक को बड़ा स्पेस देना ही पड़ता.

मदर टेरेसा की ममता हो या दलाई लामा की शांति, इंदिरा गांधी का तेवर हो या सत्यजीत रे की गंभीरता, रघु राय के लेंस से कोई भी अछूता नहीं रहा. उन्होंने 60 से ज्यादा किताबें लिखीं जो आज भारत की संस्कृति, विरासत और राजनीति का एक जीवंत दस्तावेज बनी हुई हैं.

नई पीढ़ी के लिए विरासत

सिर्फ काम करना ही उनका मकसद नहीं था, बल्कि वे इस हुनर को अगली पीढ़ी को सौंपना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने अपने बेटे नितिन राय के साथ मिलकर ‘रघु राय सेंटर फॉर फोटोग्राफी’ की स्थापना की. वे हमेशा कहते थे कि एक फोटोग्राफर को केवल देखना नहीं बल्कि महसूस करना चाहिए.

रघु राय ने भारत की धरोहरों पर जो काम किया, वह उनके जाने के बाद भी जारी है; उनकी एक दर्जन से ज्यादा किताबें अभी छपने के लिए तैयार रखी हैं. आज रघु राय हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दिल्ली की गलियों से लेकर कोलकाता की सड़कों तक उनकी विरासत अमर है और हमेशा रहेगी.

ये भी पढ़ें- गुजरात निकाय चुनाव: अहमदाबाद में पीएम मोदी और अमित शाह डालेंगे वोट, OBC आरक्षण के साथ बदली सत्ता की बिसात

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

कोलकाता एयरपोर्ट पर CISF की बड़ी कार्रवाई: बैंकॉक जा रहे 2 संदिग्धों से ₹1.13 करोड़ की अमेरिकी मुद्रा जब्त

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ ने बैंकॉक जाने वाली…

3 hours ago

रिलायंस के जामनगर कॉम्प्लेक्स पहुंचा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: मुकेश अंबानी से मिले मार्को रुबियो और सर्जियो गोर, Jio IPO को भी मिला बंपर रिस्पॉन्स

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर…

3 hours ago

दिवाली से पहले पुलिसकर्मियों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, बढ़े यूनिफॉर्म और मोटरसाइकिल भत्ते; विपक्ष पर भी साधा निशाना

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में यूपी पुलिस को बड़ा…

5 hours ago

टाइगर पर हमले से पहले किन सितारों पर थी शूटरों की नजर? जानिए किसके पास कैसी है सुरक्षा

Bollywood Celebs Security: टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है.…

5 hours ago