राहुल गांधी पर हल्द्वानी में SC-ST एक्ट में दर्ज हुआ केस
Rahul Gandhi FIR in Haldwani: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी की मुश्किलें अचानक बहुत बढ़ गई हैं. उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में राहुल गांधी के खिलाफ एक गंभीर FIR दर्ज कराई गई है. अनुसूचित जाति से आने वाले अमित कुमार नामक युवक की शिकायत पर पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ न सिर्फ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराएं ठोकी हैं बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC-ST एक्ट भी लगा दिया है.
आरोप है कि राहुल गांधी ने ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ पर बयानबाजी करके दलित समाज और अनुसूचित वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. आइए समझते हैं कि FIR में शामिल धाराएं राहुल गांधी के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं.
यह पूरा कानूनी बवंडर हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद शुरू हुआ. वहां हुए एक ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर राहुल गांधी ने तीखा बयान देते हुए इसे ‘दलित विरोधी’ करार दिया था और कई सवाल खड़े किए थे. इसी टिप्पणी से भड़के शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी के बयान से दलित और अनुसूचित वर्ग का अपमान हुआ है और दो वर्गों में नफरत फैलाने की साजिश रची गई है, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए यह मामला दर्ज किया.
1.BNS की धारा 196: राहुल गांधी पर BNS की धारा 196 लगाई गई है, जो बेहद सख्त और गैर-जमानती मानी जाती है. यह धारा तब लगती है जब कोई व्यक्ति दो समुदायों या जातियों के बीच नफरत, दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने की साजिश रचता है. आमतौर पर सांप्रदायिक या जातीय हिंसा भड़काने के आरोपियों पर इस्तेमाल होने वाली इस धारा में अगर अपराध सिद्ध हो जाता है, तो कम से कम 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.
2.BNS की धारा 299: दूसरी धारा BNS 299 भी गैर-जमानती है. यह धारा तब ठोंकी जाती है जब किसी भाषण, वीडियो या लेख के जरिए धार्मिक/सामुदायिक भावनाओं को भड़काया जाए. इसमें भी 3 साल की सजा का प्रावधान है. हालांकि, राहुल गांधी के लिए राहत की एक उम्मीद सुप्रीम कोर्ट का वो 2025 का फैसला (इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात सरकार) बन सकता है, जिसमें शीर्ष अदालत ने साफ कहा था कि केवल किसी एक व्यक्ति की भावना आहत होने से यह धारा नहीं लगाई जा सकती, जब तक कि भाषण से मौके पर कोई हिंसा या बड़ा असर न दिखा हो.
3.SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(Q): इस एफआईआर का सबसे तीखा और खतरनाक मोड़ SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(Q) है. यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी दलित या आदिवासी के खिलाफ जानबूझकर ऐसी झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाता है जिससे प्रशासनिक या पुलिस एक्शन का खतरा बने. यह भी एक गैर-जमानती धारा है, जिसमें दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 5 साल की कड़ी कैद की सजा का प्रावधान है.
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तीनों प्रमुख धाराएं (Rahul Gandhi FIR in Haldwani) गैर-जमानती होने के कारण अब सवाल उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी की गिरफ्तारी हो सकती है? कानूनी जानकारों की मानें तो राहुल गांधी के वकील अब इस FIR को खारिज (Quash) कराने या गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए तुरंत उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं. फिलहाल, हल्द्वानी में दर्ज इस केस ने पूरे देश का सियासी और कानूनी पारा हाई कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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