MNS Shiv Sena alliance in Kalyan Dombivli: महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के नतीजों के बाद से अब मेयर की कुर्सी के लिए लड़ाई छिड़ चुकी है. कई निकायों में स्पष्ट बहुमत ना मिलने के कारण स्थिति साफ नहीं हो पाई है. इस बीच ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली महा नगरपालिका में महायुति को स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच मेयर पद के लिए यहां सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है. अब खबर सामने आ रही है कि राज ठाकरे की MNS ने शिंदे गुट की शिवसेना के साथ कल्याण डोंबिवली में गठबंधन कर लिया है. जिसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं शिंदे गुट की शिवसेना अपने ही सहयोगी भाजपा के बिना मेयर बनाकर कोई बड़ा खेला न कर दे.
दरअसल, MNS और शिवसेना(शिंदे गुट) के गठबंधन की औपचारिक घोषणा भी कर दी गई है. बता दें कि MNS के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने पार्टी की ओर से इस गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया था. वहीं इससे पहले शिवसेना के 53 पार्षद कमिश्नर के ऑफिस में पहुंचे थे. उसी समय MNS के पांच पार्षद भी वहां पहुंचे. इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दो विरोधी पार्टियों ने हाथ मिला लिया है. जोकि पिछले एक दशक में महाराष्ट्र की राजनीति में इस तरह के उदाहरण की झलक है. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि MNS के प्रमुख खुद राज ठाकरे ने इस गठबंधन को लेकर अपने पार्षदों को चेतावनी दी है.
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दरअसल, हाल ही में हुए चुनावों में क्लयाण डोंबिवली की 122 सीटों पर शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. यहां शिवसेना को 53 सीटें और बीजेपी को 50 सीट पर जीत मिली थी. वहीं शिवसेना(UBT) को 11 और राज ठाकरे की पार्टी MNS को 5 सीटें मिली हैं. जबकि मेयर पद पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 62 पार्षदों का समर्थन चाहिए. अब MNS के पांच पार्षदों के समर्थन से शिवसेना के पास कुल 58 पार्षदों का समर्थन हो चुका है जिसको की गद्दी पर बैठने के लिए मात्र 4 पार्षदों के सहयोग की आवश्यकता है. वहीं बीजेपी को बिना शिवसेना के मेयर बनाने के लिए 12 पार्षदों की जरूरत पड़ेगी.
बता दें कि MNS के पांच पार्षदों के समर्थन के बाद अब शिवसेना के पास कुल 58 पार्षदों का समर्थन हो चुका है. जिसको की गद्दी पर बैठने के लिए मात्र 4 पार्षदों के सहयोग की आवश्यकता है. वहीं बीजेपी के पास मात्र 50 पार्षद ही हैं. जिसको बिना शिवसेना के मेयर बनाने के लिए 12 पार्षदों की जरूरत पड़ेगी. इस बीच खबर यह भी मिल रही है कि उद्धव गुट के कुछ पार्षद शिंदे के संपर्क में हैं. अगर शिंदे को 4 पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो कयास यह लग रहे हैं कि वो बीजेपी के बिना ही मेयर बना सकते हैं. क्योंकि बीजेपी ने मेयर पद के लिए ढाई-ढाई साल के कार्यकाल की बात भी रखी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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