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मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में एक साथ होंगे ‘नमाज’ और ‘सरस्वती पूजा’: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में नमाज और सरस्वती पूजा दोनों होगा. सीजेआई ने कहा कि मुस्लिम समुदाय से.संबंधित जो भी लोग कल नमाज अदा करेंगे, उनकी अनुमानित संख्या आज ही मजिस्ट्रेट को दे, ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीएम उन्हें पास जारी कर सकें.

दोनों पक्षो से CJI की अपील

सीजेआई ने कहा कि हम दोनों पक्षों से एक दूसरे के प्रति आपसी सम्मान और विश्वास बनाए रखने की अपील करते है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जे. के महेश्वरी की पीठ ने यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि पहले तीन बार ऐसा प्रबंध किया जा चुका है.

सीजेआई ने आगे कहा कि कल विशेष कार्यक्रम है बसंत पंचमी है. उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन से पूछा कि कल के लिए क्या इंतजाम किया गया है. प्रशासन ने भरोसा दिया कि लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रहेगा. सीजेआई ने कहा कि हम मुख्य मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं.

ASG ने दिया सुझाव

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराजन ने सुझाव दिया कि मुस्लिम समुदाय के लोग 1 से 3 बजे दोपहर उसी परिसर में अलग-जगह पर नमाज अदा करने को आए. जबकि हिन्दू पक्ष उसी परिसर के दूसरे स्थान पर बसंत पंचमी का आयोजन करें. वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि एक ही गेट है और वह स्थान कोर्ट रूम जैसा है. सुबह और शाम पूजा होगी जबकि एक से तीन के बीच नमाज अदा किया जाएगा.

बता दें कि ये याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में कहा गया था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 07 अप्रैल 2023को जारी आदेश के मुताबिक, भोजशाला में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत है. वहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को दोपहर 01 से 03 बजे के बीच नमाज पढ़ सकते है. लेकिन एएसआई के इस आदेश में यह साफ नहीं है कि अगर बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन होगी तो क्या होगा. यह याचिका वकील विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर की गई है.

क्यों है विवाद?

दायर याचिका में आगे कहा गया था कि मां सरस्वती का यह मंदिर परमार राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में बनाया था. अदालत के आदेश पर हुए सर्वे में भी यहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है. ऐसे में एएसआई का आदेश वैसे ही अपने आप में गलत है, लेकिन बसंत पंचमी का दिन तो मां सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है. उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे जरूरी धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहुति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए. ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए.

बता दें कि धार में साल 2006, 2012 और 2016 में शुक्रवार को वसंत पंचमी आई तो विवाद की स्थिति बनी. वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा जबकि शुक्रवार होने से मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है. ऐसे में वसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर समझाइश के बाद पूजा और नमाज दोनों करवाए जाते है. शुक्रवार के दिन लगभग तीन हजार मुस्लिम नमाज अदा करते है.

ये भी पढ़ें: 1984 सिख दंगा मामला: जनकपुरी मामले में एवेन्यु कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को किया बरी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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