देश

कहीं सूखा तो कहीं जलप्रलय! वायुमंडल में घुट रहा धरती का दम, वैज्ञानिकों की चेतावनी- अब नहीं संभले तो सब खत्म

Global Warming: सोचिए आने वाले सालों में इतनी भयंकर गर्मी पड़े कि लोगों का घरों से निकलना, खेत में काम करना और यहां तक कि पानी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाए. गर्मी के दिन लंबे हों, बारिश का मौसम ही ना आए और मौसम कब करवट ले ले, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाए. तो धरती पर इंसान कैसे बचेगा. ये सभी उदाहरण आने वाले समय में सच होने वाले हैं और इसको लेकर वैज्ञानिक बेहद परेशान हैं.

इसका सबसे बड़ा कारण वायुमंडल में कार्बन डाइ ऑक्साइड यानी CO2 की बढ़ोतरी है. वायुमंडल में बढ़ते कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा का सीधा असर हमारे मौसम, गर्मी, पानी, खेती और आने वाले समय में इंसानों की जिंदगी पर पड़ने वाला है.

पिछले करीब 100 सालों में वायुमंडल में CO2 की मात्रा में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का लगातार जलना है. CO2 को ग्रीनहाउस गैस कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी को वायुमंडल में रोकने का काम करती है. कुछ मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें धरती पर जीवन के लिए जरूरी हैं, लेकिन इनकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर धरती का तापमान भी बढ़ता है. यही वजह है कि बढ़ती CO2 को जलवायु परिवर्तन की बड़ी वजहों में गिना जाता है.

पिछले करीब 100 सालों में वायुमंडल में CO2 की मात्रा में बढ़ोतरी का ग्राफ (इमेज- https://science.nasa.gov)

आखिर CO2 बढ़ने से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

CO2 का बढ़ता स्तर सिर्फ तापमान के आंकड़ों में बदलाव नहीं करता. इसका असर उस गर्मी पर भी पड़ता है जिसे इंसान अपने शरीर पर महसूस करता है.

गर्मी बढ़ने के साथ पानी की मांग बढ़ती है. दूसरी तरफ ग्लेशियरों और बर्फ के तेजी से पिघलने से लंबे समय में नदियों और जल स्रोतों पर भी असर पड़ सकता है. इसका सीधा संबंध पीने के पानी, खेती और शहरों की पानी की जरूरतों से है.

किसानों के लिए भी बदलता मौसम बड़ी चुनौती बन सकता है. तापमान में बदलाव, बारिश के समय में परिवर्तन और लंबे सूखे या अचानक भारी बारिश जैसी घटनाएं फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसका असर आगे चलकर खाने वाले सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

1750 के मुकाबले 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ी CO2

वैज्ञानिक रिकॉर्ड बताते हैं कि औद्योगिक क्रांति शुरू होने के बाद से वायुमंडल में CO2 की मात्रा में 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. वैज्ञानिकों ने इस वृद्धि को मुख्य रूप से कोयला, तेल और गैस जलाने से जोड़ा है.

साल 1961 और साल 2022 में कार्बन डाइ ऑक्साइड की बढ़ोतरी दर्शाती यह इमेज NASA से ली गई है.

हवाई स्थित मौना लोआ वेधशाला में 1958 से CO2 को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है. इन आंकड़ों में एक बात साफ दिखाई देती है कि हर साल CO2 का औसत स्तर बढ़ रहा है. उपग्रहों से किए गए माप भी वायुमंडल में CO2 की बढ़ती मात्रा की तस्वीर दिखाते हैं.

हर साल क्यों ऊपर-नीचे होता है CO2 का स्तर?

CO2 की मात्रा पूरे साल एक जैसी नहीं रहती. इसके पीछे पेड़-पौधों का भी बड़ा रोल है. उत्तरी गोलार्ध में वसंत और गर्मियों के दौरान पेड़-पौधे तेजी से बढ़ते हैं और वातावरण से CO2 सोखते हैं. इससे हवा में CO2 का स्तर कुछ कम होता है.

वहीं शरद और सर्दियों में पेड़ों की वृद्धि धीमी पड़ जाती है. सूखे पत्ते और पौधों का बाकी हिस्सा जब सड़ता-गलता है तो उसमें मौजूद कार्बन का कुछ हिस्सा फिर CO2 के रूप में वातावरण में पहुंच जाता है. इसलिए CO2 के आंकड़ों में हर साल ऊपर-नीचे होने वाला एक पैटर्न दिखाई देता है.

कहीं पड़ रहा भयंकर सूखा तो कहीं हो रही बारिश

लेकिन इस उतार-चढ़ाव के बीच वैज्ञानिकों को एक बड़ी चिंता है. रिसर्च में सामने आया है कि धरती पर साल दर साल औसत CO2 का स्तर ऊपर जा रहा है. जिसका असर हम दुनिया के अलग-अलग जगहों पर लगातार हो रही प्राकृतिक घटनाओं पर पड़ रही है. कहीं भयंकर बारिश हो रही है तो कहीं भयंकर सूखा पड़ रहा है.

ये भी पढ़ें- बर्लिन के InnoTrans 2026 में दिल्ली मेट्रो की धमाकेदार एंट्री! अब पूरी दुनिया में बजेगा DMRC का डंका

बढ़ती CO2 का सबसे बड़ा खतरा यही है कि इसका असर एक-दो साल में खत्म नहीं होता. वातावरण में जमा ग्रीनहाउस गैसें लंबे समय तक जलवायु व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं. इसका मतलब है कि आज होने वाला उत्सर्जन आने वाले वर्षों के मौसम और पर्यावरण पर भी असर डाल सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

हिंदू ही नहीं, ईसाइयों पर भी जहालत…पाकिस्तान के ऐसे हैं हालात! ईशनिंदा के नाम पर फूंक डाले घर-दुकान

Pakistan Christian Attack: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखुपुरा जिले में ईशनिंदा के कथित आरोप…

8 minutes ago

दिल्ली में आज फिर ट्रैफिक जाम का झंझट: 30 जगहों पर रहेगा डायवर्जन; निकलने से पहले देख लें लिस्ट

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और SFI के प्रदर्शन के कारण रविवार को भी…

15 minutes ago

रियाद एयरपोर्ट पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, हूतियों के खिलाफ जंग में शामिल होगा अमेरिका?

Saudi Arabia airport strike: रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के बाद ट्रंप…

24 minutes ago

Bigg Boss के घर में फीमेल कंटेस्टेंट के साथ की ऐसी हरकत, बीच शो में पुलिस ने आकर किया गिरफ्तार

'बिग बॉस' के इतिहास में एक ऐसा वाकया भी आया था जब शो के बीच…

48 minutes ago