राजधानी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय केशव कुंज में चल रही अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक का रविवार को समापन हुआ. सोमवार को बैठक में हुई चर्चा की जानकारी दी. इस अवसर पर दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल , अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख द्वय नरेंद्र ठाकुर और प्रदीप जोशी उपस्थित रहे.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा कई आयोजन संघ की लिस्ट में शामिल है. जिसमें हिन्दू समाज को एक धारा में लाने, हिन्दू समाज से कुरीतियों को दूर करने पर जोर देने और सामाजिक समरसता की भावना पर हिंदू समाज में धर्म जागरण और बुराइयों को दूर करने समेत अन्य विषयों को लेकर देश में एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.
ये सम्मेलन मंडल और बस्ती स्तर पर आयोजित होंगे. हालांकि संघ की इस अभियान को लेकर कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया हुए देते इसके जरिए बीजेपी पर सत्ता बचाए रखने का आरोप लगाया है.
वही संघ हिन्दू सम्मेलनों के साथ खंड और नगर में 11,360 स्थानों पर सामाजिक सद्भाव बैठकें और 924 जिलों में प्रमुख नागरिक गोष्ठियां भी आयोजित करेगा.
देश में चल रहे भाषा विवाद को लेकर सुनील आंबेकर ने कहा कि देश की सारी भाषा मातृ भाषा है. हमें अपनी अपनी भाषा में बात करनी चाहिए. धर्मानतरण पर उन्होंने कहा कि किसी को लालच देकर या किसी अन्य प्रकार का प्रलोभन देकर धर्मांतरण उचित नहीं है.
संघ के विस्तार पर आंबेकर ने कहा कि संघ बढ़ रहा है. मणिपुर के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि वहां शांति आने लगी है. दोनों तरफ से संवाद हो रहा है, धीरे-धीरे रास्ते निकलेंगे. नक्सल क्षेत्रों में जो हिंसात्मक षड्यंत्र चल रहा है, उसे रोका जाना चाहिए. देश में लोकतंत्र है और उसी के तरीके से बात होनी चाहिए. सरकार वहां के लोगों की चिंता कर रही है, यह अच्छी बात है.
शताब्दी वर्ष में संघ की योजना हर गांव, हर घर तक पहुंचने की है. संघ अपने आयोजनों में “पंच परिवर्तन” के विषयों पर चर्चा करेगा. इसी प्रकार समाज में सद्भाव-समरसता को बढ़ावा देने के लिए 11360 खंडों/नगरों में सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन होगा. संघ रचना के अनुसार देश के 924 जिलों में प्रमुख नागरिक गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा. समूह, व्यवसाय, वर्ग के अनुसार गोष्ठियों में भारत के विचार, भारत के गौरव, भारत के स्व आदि विषयों पर चर्चा होगी. वृहद गृह संपर्क अभियान के तहत हर गांव, हर बस्ती के अधिकतम घरों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा.
शताब्दी वर्ष के सारे कार्यक्रमों का उद्देश्य व्यापक आउटरीच है, भौगोलिक, सामाजिक दृष्टि से समाज के सभी लोगों तक जाना और सभी कार्यों में उनकी सहभागिता हो. यह अभियान एक तरह से सर्वसमावेशी, सर्वस्पर्शी होगा. विजयादशमी उत्सव से शताब्दी वर्ष का शुभारंभ होगा. देशभर में आयोजित विजयादशमी उत्सवों में सभी स्वयंसेवक शामिल होंगे.
संघ के मुताबिक समाज की विशेषताएं, राष्ट्र के अपने विशेष गुणों के साथ ही समाज के सभी लोगों की चिंता करना, पर्यावरण की चिंता करना, परिवार में जीवन मूल्यों की रक्षा करना, सामाजिक जीवन में आपसी सद्भाव बना रहे, पंच परिवर्तन के इन विषयों को समाज तक लेकर जाएंगे. इस संदेश को शताब्दी वर्ष के सारे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में ले जाएंगे.
सीमावर्ती प्रांतों से आए कार्यकर्ताओं ने वहां कार्य की स्थिति व अनुभवों के बारे में बताया. संघ कार्यकर्ता समाज के साथ मिलकर स्थानीय लोगों को संगठित करने व उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं.
प्रशिक्षण वर्ग की जानकारी देते हुए बताया गया कि अप्रैल से जून तक देश भर में 100 प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया गया. 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित 75 वर्गों में 17609 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसी प्रकार 40 से 60 वर्ष की आयु के लिए आयोजित 25 वर्गों में 4270 शिक्षार्थियों ने भाग लिया. इन प्रशिक्षण वर्गों में देश के 8812 स्थानों से स्वयंसेवकों की सहभागिता रही.
भारत एक्सप्रेस
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