मुंबई की सियासत में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है और जब बात संजय राउत की हो, तो तीखे बयानों का तड़का लगना लाजिमी है. एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना (UBT) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने जिस अंदाज में अपनी बात रखी, उसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. उन्होंने सीधे तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना को ‘अमित शाह की बनाई हुई दुकान’ करार दे दिया.
राउत का कहना है कि असली शिवसेना सिर्फ वही है जहां ठाकरे हैं. उनके मुताबिक, चुनाव आयोग का फैसला या सिंबल मिलना मायने नहीं रखता, क्योंकि जनता के दिल में शिवसेना का मतलब सिर्फ बालासाहेब और उद्धव ठाकरे हैं.
संजय राउत अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने जोश में यहां तक कह दिया कि अगर आज उनके हाथ में पुलिस और चुनाव आयोग की ताकत आ जाए, तो वो भारतीय जनता पार्टी के चार टुकड़े कर देंगे. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है? तो उन्होंने बड़ा ही सीधा जवाब दिया ‘सवाल आयोग का नहीं है, हमें मोदी और शाह की कार्यशैली पर भरोसा नहीं है.’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ये लोग नेता नहीं, बल्कि व्यापारी हैं और राजनीति को भी व्यापार की तरह देख रहे हैं.
राउत ने एक बार फिर उस पुराने जख्म को कुरेदा जो महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा चर्चा का विषय रहता है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 70 सालों से दिल्ली में बैठे कुछ लोग मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की फिराक में हैं.
मुंबई में बढ़ती ‘गुंडागर्दी’ के आरोपों पर राउत ने बड़े ही ठेठ अंदाज़ में कहा, “अभी पुलिस उनके पास है, इसलिए उनकी दादागिरी चल रही है. लेकिन हम भी कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं, हम भी गुंडे हैं और अपनी जमीन बचाने के लिए उनसे डटकर मुकाबला करेंगे.” उन्होंने उद्धव और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों पर इशारा करते हुए कहा कि जब मराठी मानुष के अस्तित्व पर संकट आता है, तो भाइयों को साथ आना ही पड़ता है.
संजय राउत ने आने वाले समय को मुंबई के लिए ‘आर-पार की लड़ाई’ बताया. उन्होंने दावा किया कि शिंदे और फडणवीस सरकार चाहे जो दावे करे, लेकिन दिल्ली से मुंबई का ‘डेथ वारंट’ जारी हो चुका है और शिवसेना (UBT) उसे रोकने के लिए आखिरी दम तक लड़ेगी. कांग्रेस के साथ गठबंधन पर उन्होंने साफ किया कि उन्होंने अंत तक समझौते की कोशिश की और वे अभी भी साथ हैं, ताकि मुंबई पर फिर से भगवा लहराया जा सके.
राजनीति में मची खींचतान के बीच राउत ने एक मानवीय पहलू भी साझा किया. उन्होंने बताया कि भले ही विचारधाराएं अलग हो गई हों, लेकिन व्यक्तिगत कड़वाहट उतनी नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि एकनाथ शिंदे ने उनका हालचाल जानने के लिए फोन किया था. राउत बोले, “हमने सालों साथ काम किया है, हम दोस्त रहे हैं. महाराष्ट्र की संस्कृति में ऐसी दुश्मनी नहीं होती कि बातचीत ही बंद हो जाए. यहाँ तक कि प्रधानमंत्री ने भी फोन कर बात की थी.”
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-भारत एक्सप्रेस
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