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इंदौर के बाद मंडला में भी जहर! नलों से निकला सीवर मिला पानी, जल सप्लाई पर उठे गंभीर सवाल

Mandla Water Contamination: मुकेश बैरागी/मंडला: इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौतों की खबरों ने जिस डर और गुस्से को जन्म दिया था वह अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि मध्य प्रदेश के मंडला से एक और परेशान करने वाली तस्वीर सामने आ गई. इस बार मामला सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से पीने के पानी से जुड़ा है.

दरअसल, मंडला नगर के वार्ड क्रमांक 10, अंबेडकर वार्ड में बीते कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा था, जिसे देखकर ही लोगों का मन खराब हो जाए. बदबूदार, मटमैला और गंदा पानी. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पानी पीना तो दूर, हाथ लगाने लायक भी नहीं था. बावजूद इसके, कोई विकल्प न होने के कारण यही पानी मजबूरी में इस्तेमाल किया जा रहा था.

शिकायतें होती रहीं, सुनवाई नहीं हुई

वार्डवासियों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की. फोन किए गए, आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते गए और लोगों की चिंता बढ़ती चली गई. बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों को लेकर डर सबसे ज्यादा था कि कहीं इंदौर जैसी कोई अनहोनी यहां भी न हो जाए.

मीडिया की एंट्री के बाद टूटी चुप्पी

जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब स्थानीय लोगों ने मीडिया का रुख किया. जैसे ही मामला खबरों में आया, वैसे ही प्रशासन हरकत में नजर आया. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर खुद मौके पर पहुंचे. तत्काल जांच के आदेश दिए गए और सड़क की खुदाई कर पाइप लाइन की पड़ताल की गई.

जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

जांच के दौरान जो सामने आया, वह बेहद गंभीर था. पानी की सप्लाई लाइन में सीवर का पानी मिल रहा था. यानी जिस पानी को लोग पीने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल कर रहे थे, उसमें गंदा सीवर पानी घुल रहा था. इसके बाद आनन-फानन में सुधार कार्य शुरू किया गया और प्रभावित पाइप लाइन को दुरुस्त किया गया.

“अब स्वच्छ पानी की सप्लाई की जा रही है”

नगर पालिका के सीएमओ गजानन नाफड़े ने कहा कि समस्या की पहचान कर ली गई थी और सुधार कार्य पूरा कर लिया गया है. उनके मुताबिक अब वार्ड में स्वच्छ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है.

उन्होंने ये भी बताया कि ‘पाइप लाइन में तकनीकी खामी थी, जिसकी वजह से सीवर का पानी मिल रहा था. अब उसे ठीक कर दिया गया है और आगे ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए निगरानी रखी जाएगी.’

हालांकि लोगों के मन में अब भी कई सवाल हैं. क्या अगर मीडिया सामने नहीं आता, तो प्रशासन इसी तरह चुप रहता? क्या किसी बड़ी बीमारी या हादसे के बाद ही कार्रवाई होती? और सबसे अहम ये कि क्या लोगों की सेहत की कीमत पर ही सिस्टम जागता है?

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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