Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अपनी शानदार अंग्रेजी के लिए मशहूर शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार, उनकी बेजोड़ अंग्रेजी नहीं, बल्कि हिंदी ने सुर्खियां बटोरी हैं. सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें शशि थरूर इंग्लिश ((Shashi Tharoor English) में जवाब देते-देते हिंदी में रिप्लाई करने लगते हैं. मजबूर होकर थरूर के हिंग्लिश वाले पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. आइए बताते हैं पूरा मामला.
आपको बता दें कि कांग्रेस नेता शशि थरूर अपनी अंग्रेजी शब्दावली और वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया पर उनके हिंदी में दिए गए जवाब ने सभी को चौंका दिया. उनके प्रशंसकों का कहना है कि यह उनके लिए एक नई चुनौती थी, क्योंकि उनकी अंग्रेजी का जादू हमेशा चर्चा का विषय रहा है.
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 14 अगस्त को X पर एक पोस्ट किया,
“I hear some people are accusing India of being “recalcitrant“. I say, far better to be recalcitrant, than to be tractable, submissive or acquiescent to injustice.”
उनके पोस्ट का हिंदी में मतलब है, “मैं सुन रहा हूं कि कुछ लोग भारत को “जिद्दी” या “अड़ियल” कह रहे हैं. मैं कहता हूँ, अन्याय के सामने जिद्दी होना कहीं बेहतर है, बजाय इसके कि हम अन्याय के सामने समर्पण कर दें या उससे सहमति जताएं.”
आपको बता दें कि थरूर के पोस्ट पर सागर नाम के x यूजर ने रिप्लाई करते हुए अंग्रेजी में लिखा,
“That’s fine Shashi but what about the abnegation of camaraderie in the egregious enfranchise that comes from the fatuous of the grandiloquent at the behest of impecunious and insidious semaphore?” इसके बाद शशि थरूर ने हिंग्लिश में यूजर से पूछा, “Bhai aap kya kehna chahte ho?”
दरअसल, ये बातें तब और जटिल हो गईं जब यूजर ने इसे AI का इस्तेमाल कर अंग्रेजी में कर दिया. यूजर ने लिखा, “मैं यह कह रहा था कि सांविधिक विमर्श की अव्यवस्थित प्रासंगिकता, जब असंगत विचार-विन्यास के अप्रत्याशित परिणति-चक्र में संलयित हो जाती है, तब उसका दार्शनिक प्रत्यूत्तर भी अनिर्वचनीय निष्प्रयोजनता के व्यूह में ही गुम हो जाता है.
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यूजर की हिंदी को सामान्य शब्दों में समझें, तो इसका मतलब है, “जब कोई कानूनी या औपचारिक बातचीत बेतरतीब और असंगत विचारों से भरी हो, और इससे अप्रत्याशित नतीजे निकलें, तो इसका दार्शनिक विश्लेषण भी अर्थहीन हो जाता है.” खैर जो भी हो सच कहा जाए तो इतनी शुद्ध हिंदी भगवान जाने किसके पल्ले पडेगी और अंग्रेजी का तो क्या ही पूछना? इसीलिए कहा गया है कोई आदमी जब गुस्सा होता है या खीजता है, तो उसका असली रंग और भाषा दोनों सामने आ जाते हैं. यही वजह है कि शशि थरूर जैसे अंग्रेजी के नेक्स्ट लेवल जानकार को भी हिंदी का सहारा लेना पड़ा.
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-भारत एक्सप्रेस
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