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‘अब बहुत हुआ!’ तमिलनाडु सीएम विजय ने की NEET खत्म करने की मांग, पेपर लीक से छात्रों में भारी गुस्सा

Neet Paper Leak: नीट परीक्षा को लेकर मचे घमासान ने एक बार फिर देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. पेपर लीक के आरोपों और धांधली की खबरों के बीच अब राजनीति भी गरमा गई है. इस पूरे मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मोर्चा खोलते हुए दो टूक शब्दों में कह दिया है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट परीक्षा के इस सिस्टम को अब बंद कर देना चाहिए.

’12वीं के नंबर ही काफी हैं’

CM Vijay ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है. उनका सीधा सुझाव है कि मेडिकल में एडमिशन का आधार 12वीं की मेरिट होनी चाहिए.

विजय का मानना है कि इससे हर वर्ग के छात्र को बराबरी का मौका मिलेगा और पेपर लीक जैसे माफियाओं पर लगाम लगेगी. उन्होंने हैरानी जताई कि इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की कमेटी ने सुधार के लिए 95 सुझाव दिए थे लेकिन उन पर अमल होने के बावजूद दो साल के भीतर ही फिर से धांधली हो गई.

CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी, पांच गिरफ्तार

इधर जांच की आंच अब उन चेहरों तक पहुंच रही है जिन्होंने इस धांधली को अंजाम दिया. सीबीआई और राजस्थान पुलिस ने मिलकर जयपुर, गुरुग्राम और नासिक जैसे शहरों में छापेमारी की है. अब तक पांच आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है.

जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि परीक्षा से पहले ही एक गेस पेपर कोचिंग सेंटरों और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल, लैपटॉप और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं ताकि पेपर लीक की जड़ तक पहुंचा जा सके.

ये भी पढ़ें- NEET-UG 2026: नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू होकर 6 राज्यों तक कैसे पहुंचा लीक पेपर? समझिए पूरा रूट मैप

छात्रों का गुस्सा

देश के करीब 22 लाख से ज्यादा मेडिकल छात्र इस समय अधर में लटके हुए हैं. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद से छात्र संगठनों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. छात्रों का कहना है कि वे सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन सिस्टम की लापरवाही उनके करियर को बर्बाद कर रही है.

आपको बता दें कि तमिलनाडु सरकार लंबे समय से नीट का विरोध करती रही है. सीएम विजय का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य सरकारें चाहती हैं कि उन्हें अपने हिसाब से एडमिशन प्रक्रिया तय करने की स्वायत्तता मिले.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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