Bharat Express DD Free Dish

NEET-UG 2026: नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू होकर 6 राज्यों तक कैसे पहुंचा लीक पेपर? समझिए पूरा रूट मैप

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने उस ‘रूट मैप’ को डिकोड कर लिया है जिसके जरिए पेपर देश भर में फैला. नासिक में तैयार हुई पहली डिजिटल कॉपी से लेकर सीकर के ‘प्राइवेट माफिया’ नेटवर्क तक, यहां समझें इस पूरी साजिश की एक-एक कड़ी.

NEET-UG 2026, Paper Leak, CBI Investigation

NEET-UG 2026 की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है पेपर लीक का एक ऐसा उलझा हुआ जाल सामने आ रहा है जिसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं. अब यह साफ हो गया है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित ‘इंटर-स्टेट ऑपरेशन’ था. जांच में खुलासा हुआ है कि पेपर लीक की आग नासिक से शुरू हुई और देखते ही देखते राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और केरल तक फैल गई.

नासिक में रची गई पहली साजिश

इस पूरी कहानी का ‘जीरो पॉइंट’ महाराष्ट्र का नासिक है. यहां एक स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस में पहली बार पेपर के साथ छेड़छाड़ की गई. आरोपियों ने न केवल प्रश्नपत्र की पहली डिजिटल कॉपी तैयार की, बल्कि हाई-टेक पोर्टेबल स्कैनर का इस्तेमाल कर उसकी कई प्रतियां भी निकाल लीं. यह इस पूरे नेटवर्क की पहली ईंट थी.

नासिक से गुरुग्राम

नासिक में कॉपी तैयार होने के बाद इसे सबसे पहले हरियाणा भेजा गया. सूत्रों के मुताबिक, गुरुग्राम में एक डॉक्टर इस चेन की अहम कड़ी था, जिसके पास यह पेपर पहुंचाया गया. यहीं से इस अवैध नेटवर्क ने रफ्तार पकड़ी और पेपर को उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भेजने की तैयारी शुरू हुई.

राजस्थान बना ट्रांजिट हब

हरियाणा से यह पेपर राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचा. लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ. जयपुर से इसे जमवारामगढ़ भेजा गया और फिर वहां से पहुंचाया गया राजस्थान के कोचिंग हब ‘सीकर’ में. सीकर इस पूरे रैकेट का मुख्य कंट्रोल रूम बन गया. यहां न केवल पेपर को छात्रों तक पहुंचाने की रणनीति बनी बल्कि यहीं से इसे देश के अन्य कोनों में सप्लाई किया गया.

ये भी पढे़ं- CBSE 12th Result 2026: सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट घोषित, 85.20% छात्र पास; लड़कियों ने मारी बाजी, जानें कैसे चेक करें रिजल्ट

सीकर से देशभर में फैला प्राइवेट माफिया

सीकर को केंद्र बनाकर इस नेटवर्क ने अपनी जड़ें जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल जैसे राज्यों तक फैला दीं. ‘प्राइवेट माफिया’ नाम के टेलीग्राम ग्रुप के जरिए इस लीक पेपर को गेस पेपर के नाम पर बेचा गया. हैरानी की बात यह है कि बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के 35 से ज्यादा सवाल इस लीक कॉपी से हूबहू मिल रहे थे.

जांच का नया रुख

एजेंसियों को शक है कि इस पूरे रूट को मैनेज करने के लिए एक निजी कूरियर कंपनी और कुछ कोचिंग संस्थानों के बीच सांठगांठ थी. डेटा ट्रांसफर को सुरक्षित रखने के लिए शैडो सर्वर और लीज्ड लाइन्स का इस्तेमाल यह बताता है कि अपराधी तकनीक के मामले में काफी एडवांस थे. फिलहाल राजस्थान SOG ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर केस CBI को सौंप दिया है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read