केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े दो विधेयक संसद में पेश किए. इन विधेयकों को चर्चा के लिए संयुक्त समिति को भेजा गया है. इससे पहले, सरकार ने इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी. यह रिपोर्ट पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने तैयार की थी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ जैसी बड़ी योजना की रिपोर्ट तैयार करने में सरकार ने कितना खर्च किया होगा? इंडिया टुडे द्वारा दायर एक RTI के जरिए पता चला है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने में सरकार ने करीब 95,000 रुपये खर्च किए.
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ रिपोर्ट का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा के चुनावों को एक साथ कराना है. सरकार का मानना है कि इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी और प्रशासनिक कामकाज में सुधार होगा. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 2 सितंबर 2023 को एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई थी. कमेटी ने 14 मार्च 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.
RTI के अनुसार, रिपोर्ट तैयार करने में हर दिन का औसत खर्च 491 रुपये आया. कुल खर्च 95,344 रुपये रहा. माना जा रहा है कि कमेटी ने बेहद समर्पण से यह काम किया. अगर छुट्टियों और गैर-कार्यकारी दिनों को भी जोड़ा जाए, तो प्रति दिन का औसत खर्च थोड़ा बढ़ सकता है.
इंडिया टुडे ने RTI दायर कर सरकार से जानकारी मांगी थी कि रिपोर्ट तैयार करने में किन-किन चीजों पर खर्च हुआ. सरकार ने बताया कि इस खर्च में ड्राफ्टिंग, रिसर्च, ट्रैवल, प्रिंटिंग और पब्लिकेशन का खर्च शामिल है. इसके अलावा सूचना, कंप्यूटर, टेलीकम्युनिकेशन, मशीनरी और डिजिटल उपकरणों पर भी खर्च हुआ.
कमेटी के सदस्यों को भुगतान के सवाल पर सरकार ने जानकारी दी कि किसी भी सदस्य ने इस काम के लिए कोई फीस नहीं ली. सभी ने यह काम बिना किसी भुगतान के किया. कमेटी के प्रमुख सदस्य थे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद. इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह, गुलाम नबी आजाद, एनके सिंह, सुभाष कश्यप, सीनियर वकील हरीश साल्वे और पूर्व केंद्रीय सर्तकता आयुक्त संजय कोठारी भी सदस्य थे. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशेष आमंत्रित सदस्य थे. इस कमेटी में नितिन चंद्र ने सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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